केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के मुताबिक, यह सर्वे अभियान 8 मार्च को देशभर में एक साथ किया गया। शुरुआती जांच में करीब 408 करोड़ रुपए की बिक्री छिपाने का मामला सामने आया। जांच में पता चला कि कई रेस्टोरेंट्स बिल डिलीट करने, रिकॉर्ड में बदलाव करने और बिक्री कम दिखाने जैसे तरीके अपनाकर टैक्स चोरी कर रहे थे।
आयकर विभाग ने नवंबर 2025 में फूड एंड बेवरेज (F&B) सेक्टर में टैक्स चोरी के पैटर्न की जांच शुरू की थी। इसके तहत 1.77 लाख रेस्टोरेंट्स के लेन-देन का एआई आधारित विश्लेषण किया गया और इसे आयकर रिटर्न में घोषित टर्नओवर से मिलाया गया। इस प्रक्रिया में कई रेस्टोरेंट्स ने अपनी आय कम दिखाई और कई जगह बिक्री का पूरा रिकॉर्ड ही रिटर्न या खातों में दर्ज नहीं था।
अभियान के तहत 22 राज्यों के 46 शहरों में 62 रेस्टोरेंट्स पर सर्वे किया गया। विभाग ने 63 हजार रेस्टोरेंट्स को नोटिस भेजते हुए उन्हें 31 मार्च 2026 तक अपने रिटर्न अपडेट करने के निर्देश दिए हैं। यह कदम स्वैच्छिक अनुपालन बढ़ाने और टैक्स चोरी रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।
जांच में यह भी पता चला कि कई रेस्टोरेंट्स “पेट पूजा” जैसे सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रोजाना होने वाली बिक्री का डेटा डिलीट कर देते थे, ताकि आय कम दिखाई जा सके। भोपाल के मिलन स्वीट्स एंड रेस्टोरेंट में भी इसी तरह का सॉफ्टवेयर इस्तेमाल किया जा रहा था। आयकर अधिकारियों ने जांच के दौरान इस डेटा को रिकवर किया और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए।
आयकर विभाग का कहना है कि यह अभियान न सिर्फ बड़े रेस्टोरेंट्स बल्कि पूरे F&B सेक्टर में टैक्स अनुपालन सुधारने के लिए लगातार जारी रहेगा।