मंदिरों में भक्तिमय माहौल
शहर के प्रसिद्ध शीतला माता मंदिर सहित अन्य मंदिरों में सुबह से महिलाएं दर्शन और पूजा के लिए पहुंच रही थीं। मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना का क्रम लगातार चलता रहा, और भक्तिमय वातावरण में महिलाएं भक्ति भाव से माता के दर्शन में लीन रही।
सात दिनों तक चलती है पूजा परंपरा
श्रद्धालु संतोष मालवीय ने बताया कि यह परंपरा सदियों पुरानी है। इसके अनुसार, एक दिन पहले भोजन तैयार किया जाता है और रात करीब एक बजे माता को भोग अर्पित किया जाता है। माता को ठंडा भोग अर्पित करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और किसी प्रकार की परेशानी नहीं आती।
मंदिरों में महिलाएं देर रात से ही पूजा के लिए जुटने लगती हैं और सात दिनों तक लगातार माता के दर्शन करती हैं।
रोगों से मुक्ति और स्वास्थ्य की कामना
श्रद्धालु शिल्पा मित्तल ने बताया कि शीतला माता की पूजा विशेषकर चैत्र कृष्ण सप्तमी या अष्टमी को की जाती है। इस दिन घर में नया भोजन नहीं बनाया जाता, बल्कि पहले दिन तैयार पकवान जैसे मीठे चावल, दही और पूड़ी माता को अर्पित किए जाते हैं।
इस पूजा से चेचक और अन्य चर्म रोगों से रक्षा होती है और आरोग्य की प्राप्ति होती है। श्रद्धालुओं का मानना है कि माता का आशीर्वाद घर में स्वास्थ्य और समृद्धि बनाए रखता है।
बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंचीं
पूजा के दौरान महिलाएं हर दिन सुबह मंदिर पहुंचकर माता को जल और भोग अर्पित करती हैं। छठे दिन विशेष भोजन लाकर सामूहिक पूजा की जाती है और सातवें दिन विधि-विधान से समापन पूजा होती है।
वर्षों पुरानी इस परंपरा को उज्जैन की महिलाएं आज भी पूर्ण श्रद्धा और आस्था के साथ निभा रही हैं। इस अवसर पर महिलाएं अपने घर से ठंडाई और भोग तैयार कर मंदिर पहुंचीं और माता से परिवार की खुशहाली, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्रार्थना की।
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