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चैत्र नवरात्रि 2026: दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा और आरती


नई दिल्ली । आज चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन है, जो मां ब्रह्मचारिणी के नाम समर्पित है। हिन्दू धर्मग्रंथों में मां ब्रह्मचारिणी को तपस्या, संयम, ज्ञान और वैराग्य की देवी कहा गया है। उनका यह रूप भक्तों को साधना और संयम की प्रेरणा देता है। मान्यता है कि सच्चे मन से मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से मनचाहा वरदान प्राप्त होता है।

नवरात्रि के दूसरे दिन श्रद्धालु सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और सफेद या पीले वस्त्र धारण कर पूजा करते हैं। मां के सामने दीपक जलाना, फूल अर्पित करना और भोग चढ़ाना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान मंत्र जाप करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मन को शांति मिलती है। इस दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 से 12:53 तक विशेष फलदायी माना गया है।

पूजा के बाद मां की आरती गाना या सुनना अत्यंत शुभ होता है। आरती के माध्यम से भक्त मां की कृपा प्राप्त कर अपने जीवन में सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। यहां पढ़ें मां ब्रह्मचारिणी माता की आरती:

ब्रह्मचारिणी माता की आरती

ओम जय ब्रह्मचारिणी मां
अपने भक्त जनों पे करती सदा ही दया
ओम जय ब्रह्मचारिणी मां।

दर्शन अनुपम मधुरम, साद नारद रेहती
शिव जी की आराधना, मैया सदा करती
ओम जय ब्रह्मचारिणी मां।

बाएँ हाथ कमंडल, दाहिन में माला
रूप जो तिरीमय अद्भुत, सुख देने वाला
ओम जय ब्रह्मचारिणी मां।

देव ऋषि मुनि साधु, सब गुण मां के गाते
शक्ति स्वरूपा मैया, सब तुझको ध्याते
ओम जय ब्रह्मचारिणी मां।

संयम तप वैराग्य, प्राणी वो पाता
ब्रह्मचारिणी मां को, जो निशिदिनी ध्याता
ओम जय ब्रह्मचारिणी मां।

नव दुर्गो में मैया, दूजा तुम्हारा स्वरूप
श्वेत वस्त्र धारिणी मां, ज्योतिर्मय तेरा रूप
ओम जय ब्रह्मचारिणी मां।

दूजे नवरात्रे मैया, जो तेरा व्रत धारे
करके दया जग जननी, तू उसको तारे
ओम जय ब्रह्मचारिणी मां।

शिव प्रिय शिवा ब्रम्हाणी, हम पे दया करियो
बालक है तेरे ही, दया दृष्टि रखियो
ओम जय ब्रह्मचारिणी मां।

शरण तिहारी आए, ब्रम्हाणी माता
करुणा हम पे दिखाओ, शुभ फल की दाता
ओम जय ब्रह्मचारिणी मां।

जो कोई गावे, कहत शिवानंद स्वामी
मन वांछित फल पावे, ओम जय ब्रह्मचारिणी मां।

पूजा और आरती के साथ मंत्र का जाप करना भी अत्यंत प्रभावशाली होता है। मां ब्रह्मचारिणी के प्रमुख मंत्र हैं:

ब्रह्मचारयितुम शीलम यस्या सा ब्रह्मचारिणी
सच्चीदानन्द सुशीला च विश्वरूपा नमोस्तुते

या देवी सर्वभेतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
दधाना कर मद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।
इस दिन विधिपूर्वक पूजा, आरती और मंत्र जाप करने से मानसिक शांति, आत्मविश्वास, संयम और जीवन में सफलता प्राप्त होती है। चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती है।

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