Chambalkichugli.com

आयुर्वेद का नियम तोड़ा तो बढ़ेंगी बीमारियां भोजन के साथ फल खाने से बचें

नई दिल्ली: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में खानपान की आदतें तेजी से बदल रही हैं। शादी समारोह, पार्टियों और होटलों में भोजन के साथ फल परोसना एक आम चलन बन चुका है। लोग इसे हेल्दी समझकर बिना सोचे-समझे खा लेते हैं, लेकिन आयुर्वेद इस आदत को सही नहीं मानता और इसे पाचन के लिए हानिकारक बता सकता है।

आयुर्वेद के अनुसार हर खाद्य पदार्थ की अपनी तासीर और पाचन समय होता है। दाल, रोटी, चावल जैसे पके हुए भोजन को पचने में समय लगता है, जबकि फल हल्के होते हैं और जल्दी पच जाते हैं। जब इन दोनों को एक साथ खाया जाता है तो पाचन तंत्र भ्रमित हो जाता है। फल पहले पचने की कोशिश करते हैं, जबकि भारी भोजन को अधिक समय चाहिए होता है। इस असंतुलन के कारण भोजन पेट में रुककर सड़ने लगता है, जिससे गैस, कब्ज, एसिडिटी और भारीपन जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

इसके अलावा, होटलों या फंक्शन्स में परोसे जाने वाले फल अक्सर ठंडे या स्टोर किए हुए होते हैं। ऐसे फल पाचन अग्नि को कमजोर कर देते हैं, जिससे खाना ठीक से नहीं पच पाता। आयुर्वेद में पाचन अग्नि को शरीर का मूल आधार माना गया है और इसके कमजोर होने से कई रोग जन्म ले सकते हैं।

आयुर्वेद यह भी कहता है कि भोजन केवल स्वाद के लिए नहीं बल्कि एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसमें समय, मात्रा और संयोजन का विशेष महत्व होता है। गलत संयोजन को विरुद्ध आहार कहा जाता है, जो लंबे समय में शरीर में विषैले तत्वों के जमाव का कारण बन सकता है।

फल खाने का सही समय सुबह या शाम माना गया है। सुबह खाली पेट फल खाना सबसे ज्यादा लाभकारी होता है, क्योंकि उस समय पाचन तंत्र साफ और सक्रिय होता है। हालांकि सुबह खट्टे फलों से बचना चाहिए, क्योंकि ये गैस और जलन बढ़ा सकते हैं। शाम को भी सूरज ढलने से पहले फल खाए जा सकते हैं, लेकिन भोजन और फल के बीच कम से कम एक घंटे का अंतर रखना जरूरी है।

एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि फल को दूध या दही के साथ नहीं खाना चाहिए। आयुर्वेद इसे विरुद्ध आहार मानता है और इससे पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

यदि आप फल और भोजन दोनों का पूरा पोषण लेना चाहते हैं तो इन्हें अलग-अलग समय पर खाना ही बेहतर है। छोटी-सी यह आदत आपके पाचन को बेहतर बना सकती है और कई बीमारियों से बचाने में मदद कर सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *