वैद ने कहा कि अतीक अहमद के पाकिस्तान से संबंध और अवैध हथियारों की तस्करी से जुड़े मामले किसी से छिपे नहीं हैं। उनके मुताबिक, “अतीक अहमद भले ही सांसद रहा हो, लेकिन वह एक कुख्यात गैंगस्टर था। उसके पास अवैध हथियार कैसे पहुंचते थे और पाकिस्तान से उसके क्या रिश्ते थे, यह जगजाहिर है। फिल्म इसी हकीकत को सामने लाती है।”
पूर्व डीजीपी ने यह भी आरोप लगाया कि देश में कुछ नेता जाली नोटों के रैकेट में शामिल रहे हैं और पाकिस्तान तक मशीनें पहुंचाने में उनकी भूमिका रही। उन्होंने कहा कि ऐसे हालातों के चलते ही नोटबंदी जैसा कड़ा कदम उठाना पड़ा था।
विपक्षी दलों द्वारा फिल्म को “सरकारी प्रोपेगेंडा” बताए जाने पर वैद ने पलटवार करते हुए कहा, “जब तक दाऊद इब्राहिम के पैसे से फिल्में बनती थीं, तब तक किसी को समस्या नहीं थी। अब जब सच्चाई दिखाई जा रही है, तो लोगों को मिर्ची लग रही है।” उन्होंने साफ किया कि इस फिल्म में किसी सरकारी फंड का इस्तेमाल नहीं हुआ है और यह वास्तविक घटनाओं से प्रेरित एक साहसिक प्रयास है।
फिल्म को लेकर देश में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जहां एक तरफ इसे समर्थन मिल रहा है, वहीं कुछ राजनीतिक दल इसे प्रोपेगेंडा करार देकर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, एस.पी. वैद का मानना है कि फिल्म की कहानी वास्तविक तथ्यों के काफी करीब है और इसे उसी नजरिए से देखा जाना चाहिए।