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लंबे युद्ध की तैयारी….. फूड सप्लाई सुरक्षित करने में जुटा ईरान, खाद्यान से भरे 6 जहाज होर्मुज से गुजरे


तेहरान।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर ईरान (Iran) की सख्त पहरेदारी है। तेल वाले जहाजों को यहां से गुजरने की मनाही है। सिर्फ इक्का-दुक्का जहाज ही, ईरान की सहमति से इधर से जा रहे हैं। इस बीच ईरान ने कुछ और जहाजों को भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की इजाजत दी है। यह कार्गो जहाज हैं, जिन पर खाद्यान्न और अन्य कृषि पदार्थ लदे हुए हैं। अमेरिका (America) के साथ चल रहे युद्ध के बीच ईरान अपने देश में फूड सप्लाई को सुरक्षित रखना चाहता है। इसे इस तरह भी देखा जा रहा है कि अगर युद्ध लंबा चलता है तो ईरान में भुखमरी की हालत न पैदा होने पाए। यह सभी जहाज ग्रीक मैनेजमेंट की निगरानी वाले हैं। बता दें कि 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से बहुत कम जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरे हैं। इसमें भी पश्चिम के जहाजों के लिए तो यह रास्ता लगभग बंद ही है। 11 मार्च को स्टार ग्वानेथ नाम का जहाज यहां से गुजर रहा था, जिस पर मिसाइल से हमले हुए थे।


15 और 16 मार्च को गुजरे

मरीन ट्रैकिंग डेटा के आंकड़ों के मुताबिक कम से कम छह जहाज, 15 और 16 मार्च के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरे हैं। इन सभी ने उत्तरी खाड़ी के बेहद महत्वपूर्ण वाणिज्यिक केंद्र, ईरान के इमाम खुमैनी बंदरगाह पर माल उतारा। एनालिस्ट फर्म केपलर के मुताबिक नौ मार्च के बाद से पोर्ट पर माल उतारने के बाद पांच अन्य जहाज भी होर्मुज से होकर गुजरे हैं। इन सभी ने वैकल्पिक शिपिंग लेन का उपयोग किया। इन जहाजों में से एक, गियाकोमेटी था, जिसमें कनाडाई सोयाबीन ले जाई गई। इसने शुक्रवार को खाड़ी में प्रवेश किया। इनके आने का उद्देश्य घरेलू खाद्य आपूर्ति को बनाए रखना दिखाई देता है। बता दें कि ईरान अपनी खाद्य जरूरतों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा खुद पैदा करता है। वहीं, अनाज और तेल बीजों के आयात पर निर्भर रहता है। इनका इस्तेमाल कुकिंग ऑयल और पशु चारे के लिए किया जाता है।


अनाज स्टोर करने पर जोर

ग्रेन कंसल्टेंसी सॉइकॉन के मैनेजिंग डायरेक्टर आंद्रे सिजोव के मुताबिक, ईरान हर साल करीब 1.5 मिलियन टन मक्के का उत्पादन करता है। वहीं, ब्राजील से 8 मिलियन से 10 मिलियन टन तक का आयात भी करता है। उन्होंने बताया कि कृषि इस देश के लिए एक बड़ी परेशानी है। वजह, यहां पर पानी की कमी के चलते उत्पादन ठीक नहीं रहता। यह किसानों के लिए एक बड़ी समस्या है। बता दें कि युद्ध से पहले ईरान ने करीब 4 मिलियन टन गेहूं का रणनीतिक भंडार तैयार कर लिया था। यह चार महीने तक उसकी घरेलू मांग को पूरा करने में सक्षम है। कृषि मंत्री गोलामरेजा नूरी गेजेलजेह ने हाल ही में कहा कि बेकरीज को लगभग दो महीने के आटे का आवंटन किया गया है। नागरिकों से अपील की गई है कि वह घबराकर खरीदारी न करें।

गौरतलब है कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के युद्ध के चलते ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नाकेबंदी कर रखी है। बहुत ही सीमित संख्या में यहां से जहाजों का आना-जाना हो रहा है। होर्मुज को लेकर ईरान की सख्ती के चलते वैश्विक व्यापार को बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। गौरतलब है कि दुनिया के तेल सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरता है। अब यहां से सप्लाई बंद होने के चलते तेल और गैस की कीमतों में काफी ज्यादा इजाफा हो रहा है।

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