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5 मौतें और भीड़ का बेरहम चेहरा ग्वालियर हादसे में मदद से ज्यादा मोबाइल उठा


ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने न सिर्फ सड़क सुरक्षा बल्कि समाज की संवेदनशीलता पर भी गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। थाठीपुर थाना क्षेत्र के परशुराम चौराहे के पास हुए भीषण सड़क हादसे में पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा इतना भयावह था कि टक्कर के बाद घटनास्थल पर चीख पुकार मच गई लेकिन सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि वहां मौजूद लोगों का व्यवहार इंसानियत को शर्मसार करने वाला था।

जानकारी के मुताबिक एक तेज रफ्तार बोलेरो कार ने ऑटो को जोरदार टक्कर मार दी। ऑटो में चालक सहित कुल नौ लोग सवार थे जो शीतला माता के दर्शन कर वापस लौट रहे थे। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ऑटो के परखच्चे उड़ गए और पांच लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। मृतकों में तीन महिलाएं और दो पुरुष शामिल बताए जा रहे हैं। वहीं चार अन्य घायल जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं और उनका इलाज अस्पताल में जारी है।

हादसे के बाद जो दृश्य सामने आया उसने सभी को झकझोर कर रख दिया। जहां एक तरफ घायल लोग दर्द से तड़प रहे थे वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग उनकी मदद करने के बजाय मोबाइल फोन निकालकर वीडियो बनाने और सेल्फी लेने में जुट गए। वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक युवक लाशों के पास खड़ा होकर सेल्फी ले रहा है मानो वह किसी सामान्य घटना का हिस्सा हो। आसपास खड़े कुछ लोग इस हरकत पर नाराजगी जताते हुए यह कहते भी सुनाई दे रहे हैं कि क्या किसी में हिम्मत नहीं है कि घायलों को अस्पताल पहुंचाया जाए।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मौके पर मौजूद कुछ लोग लगातार चिल्लाते रहे कि घायलों को तुरंत अस्पताल ले जाया जाए लेकिन भीड़ में से बहुत कम लोगों ने आगे आकर मदद की। यह स्थिति न सिर्फ दुखद बल्कि चिंताजनक भी है क्योंकि ऐसे समय में हर सेकंड कीमती होता है और समय पर मदद मिल जाए तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।

इस घटना ने सोशल मीडिया पर भी भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर हम किस दिशा में जा रहे हैं जहां इंसान की जान से ज्यादा अहमियत वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट को दी जा रही है। कई यूजर्स ने इसे मानवता का पतन बताया है और ऐसी मानसिकता पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है। साथ ही घायलों के बेहतर इलाज की व्यवस्था की जा रही है।

यह हादसा सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं बल्कि समाज के लिए एक आईना भी है जो दिखाता है कि तकनीक के इस दौर में हम संवेदनाओं से कितनी दूर होते जा रहे हैं। जरूरत इस बात की है कि ऐसे हादसों के समय लोग तमाशबीन बनने के बजाय जिम्मेदार नागरिक बनें और जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आएं क्योंकि कई बार एक छोटा सा कदम किसी की जिंदगी बचा सकता है।

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