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पेट्रोल-डीजल कीमतें स्थिर, एक्साइज में कटौती से तेल कंपनियों के नुकसान की भरपाई करेगी सरकार


नई दिल्ली  केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। हालांकि, एक्साइज ड्यूटी में की गई कटौती का फायदा सीधे उपभोक्ताओं को नहीं मिलेगा, बल्कि इसका उपयोग सरकारी तेल कंपनियों के नुकसान की भरपाई के लिए किया जाएगा। सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है।

तेल कंपनियों को हो रहा भारी नुकसान

पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियां—इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम—लागत से कम कीमत पर ईंधन बेच रही हैं। मौजूदा हालात में पेट्रोल पर लगभग 26 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर करीब 81.90 रुपए प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। कुल मिलाकर, ये कंपनियां रोजाना लगभग 2,400 करोड़ रुपए का घाटा झेल रही हैं, जो लंबे समय तक टिकाऊ नहीं है।

एक्साइज ड्यूटी में कटौती का मकसद

सरकार ने पेट्रोल और डीजल दोनों पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए प्रति लीटर की कमी की है। इस कदम से तेल कंपनियों के नुकसान में आंशिक राहत मिलेगी। मंत्रालय का कहना है कि इससे प्रति लीटर करीब 10 रुपए तक की भरपाई हो सकेगी, जिससे कंपनियां बिना किसी बाधा के ईंधन की सप्लाई जारी रख पाएंगी और बाजार में स्थिरता बनी रहेगी।

अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और सप्लाई चेन में बाधाओं के कारण तेल की कीमतें चार हफ्तों में लगभग 75% बढ़कर 70 डॉलर प्रति बैरल से 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। ऐसे में कई देशों में ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है—दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में 30-50%, उत्तरी अमेरिका में करीब 30% और यूरोप में लगभग 20% तक।

भारत ने रखा स्थिर रुख

इन वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर बनाए रखा है। सरकार का मानना है कि इससे आम लोगों को महंगाई के झटके से बचाया जा सकता है। हालांकि, इस स्थिरता की कीमत सरकार और तेल कंपनियों को उठानी पड़ रही है, जिसे एक्साइज कटौती और अन्य उपायों से संतुलित किया जा रहा है।

वित्त मंत्री का बयान

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को देखते हुए यह फैसला लिया गया है, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं को कीमतों में बढ़ोतरी से बचाया जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटकर 3 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर शून्य हो गई है।

निर्यात पर भी लगाया गया शुल्क

सरकार ने डीजल और एटीएफ (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) के निर्यात पर भी शुल्क लगाया है। डीजल पर 21.5 रुपए प्रति लीटर और एटीएफ पर 29.5 रुपए प्रति लीटर का शुल्क तय किया गया है। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में इन उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

आम लोगों के लिए क्या मायने?

आम उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल राहत की बात यह है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ेंगी। हालांकि, एक्साइज कटौती का सीधा फायदा उन्हें नहीं मिलेगा। यह कदम बाजार में स्थिरता बनाए रखने और ईंधन की लगातार आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

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