Chambalkichugli.com

ADR रिपोर्ट में खुलासा: BSP को 19 साल से नहीं मिला बड़ा चंदा, BJP को मिला भारी फंड

 
नई दिल्ली। देश की राजनीति में फंडिंग को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। Association for Democratic Reforms (ADR) की ताजा रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, जिसमें बताया गया है कि Bahujan Samaj Party (बसपा) ने पिछले 19 वर्षों से 20,000 रुपये से अधिक का कोई चंदा मिलने की जानकारी नहीं दी है। यह लगातार एक जैसा दावा अब पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े कर रहा है।

19 साल से एक जैसा दावा, चर्चा तेज

रिपोर्ट के मुताबिक, बसपा ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में भी यही बताया कि उसे 20,000 रुपये से अधिक का कोई दान नहीं मिला। पिछले करीब दो दशकों से पार्टी का यह रुख बना हुआ है, जो राजनीतिक हलकों में चर्चा और जांच का विषय बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतने लंबे समय तक ऐसा दावा होना असामान्य है और इससे फंडिंग की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।

कुल चंदे में 161% की बड़ी बढ़ोतरी

 रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 में राष्ट्रीय दलों को मिलने वाले कुल चंदे में 161% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। इस दौरान 11,343 दानदाताओं से कुल 6,648.56 करोड़ रुपये का योगदान मिला। यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में 4,104.28 करोड़ रुपये ज्यादा है, जो राजनीतिक फंडिंग में तेजी को दर्शाता है।

बीजेपी सबसे आगे, रिकॉर्ड फंडिंग

Bharatiya Janata Party (बीजेपी) को सबसे ज्यादा चंदा मिला है। पार्टी को 5,522 दानदाताओं से 6,074.01 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जो अन्य सभी राष्ट्रीय दलों के कुल चंदे से करीब 10 गुना ज्यादा है। यह बढ़त भारतीय राजनीति में बीजेपी की मजबूत फंडिंग स्थिति को दिखाती है।

कांग्रेस और अन्य दलों में भी उछाल

Indian National Congress (कांग्रेस) को भी चंदे में बड़ा इजाफा देखने को मिला है। 2023-24 में जहां पार्टी को 281.48 करोड़ रुपये मिले थे, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 517.39 करोड़ रुपये हो गया यानी करीब 84% की वृद्धि। वहीं Aam Aadmi Party (आप) को 27.04 करोड़ रुपये (244% वृद्धि) और National People’s Party (एनपीपी) को 1.94 करोड़ रुपये (1313% वृद्धि) का चंदा मिला है, जो छोटे दलों के लिए उल्लेखनीय उछाल है।

पारदर्शिता पर उठे सवाल

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि बीजेपी का चंदा अन्य प्रमुख दलों—कांग्रेस, आप, माकपा और एनपीपी—के संयुक्त चंदे से भी कई गुना ज्यादा है। वहीं, बसपा द्वारा लगातार 19 वर्षों से 20,000 रुपये से अधिक का चंदा न दिखाना राजनीतिक फंडिंग की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मुद्दा सिर्फ एक पार्टी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे राजनीतिक फंडिंग सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत को उजागर करता है।

बहस का बना मुद्दा

राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। ADR की यह रिपोर्ट एक बार फिर इस मुद्दे को केंद्र में ले आई है। आने वाले समय में इस पर राजनीतिक और कानूनी स्तर पर बहस तेज होने की संभावना है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *