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अंतरिक्ष में खेती का कमाल: जानिए ‘वेजी’ सिस्टम कैसे उगाता है पौधे


नई दिल्ली जैसे-जैसे इंसान गहरे अंतरिक्ष मिशनों की ओर कदम बढ़ा रहा है, वहां लंबे समय तक रहने की चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। इन्हीं चुनौतियों में एक बड़ी जरूरत है ताजा और पौष्टिक भोजन की। इसी को ध्यान में रखते हुए NASA ने अंतरिक्ष में खेती का अनोखा प्रयोग शुरू किया है, जिसे ‘वेजी’ (Veggie) सिस्टम कहा जाता है। यह सिस्टम International Space Station (आईएसएस) पर स्थापित है और अंतरिक्ष यात्रियों को ताजी सब्जियां उपलब्ध कराने के साथ-साथ पौधों की वृद्धि पर शोध करने में मदद कर रहा है।

क्या है ‘वेजी’ सिस्टम?

‘वेजी’ एक छोटे स्पेस गार्डन की तरह काम करता है, जिसका आकार लगभग एक कैरी-ऑन बैग जितना होता है। इसमें एक समय में करीब छह पौधे उगाए जा सकते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य माइक्रोग्रैविटी यानी शून्य गुरुत्वाकर्षण में पौधों की वृद्धि को समझना और अंतरिक्ष यात्रियों के लिए ताजा भोजन उपलब्ध कराना है। यह सिस्टम अंतरिक्ष में आत्मनिर्भर जीवन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

कैसे काम करता है यह स्पेस गार्डन?

वेजी सिस्टम में पौधों को मिट्टी के बजाय खास “प्लांट पिलो” (तकिए) में उगाया जाता है, जिनमें उर्वरक और जरूरी पोषक तत्व पहले से भरे होते हैं। ये पिलो जड़ों तक पानी, हवा और पोषण का संतुलन बनाए रखते हैं। अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण न होने के कारण पानी बूंदों या बुलबुलों के रूप में तैरता है, जिससे पौधों को पानी देना एक बड़ी चुनौती बन जाता है।
इस समस्या से निपटने के लिए वेजी में विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। पौधों को ऊपर से एलईडी लाइट्स द्वारा रोशनी दी जाती है, जिसमें लाल और नीली किरणें प्रमुख होती हैं। यही कारण है कि वेजी चैंबर अक्सर गुलाबी या लाल रंग में चमकता दिखाई देता है।

अंतरिक्ष में उगीं ये फसलें

अब तक इस सिस्टम में कई प्रकार की फसलें सफलतापूर्वक उगाई जा चुकी हैं। इनमें लेट्यूस की अलग-अलग किस्में, चाइनीज कैबेज, मिजुना सरसों, लाल रशियन केल और जिनिया जैसे फूल शामिल हैं। खास बात यह है कि कुछ फसलों को अंतरिक्ष यात्रियों ने वहीं खाया भी, जबकि कुछ नमूनों को पृथ्वी पर वैज्ञानिक अध्ययन के लिए भेजा गया।

मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद

अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहना मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में पौधों की देखभाल करना अंतरिक्ष यात्रियों के लिए तनाव कम करने का एक तरीका बनता है। NASA का मानना है कि पौधे उगाने से उन्हें पृथ्वी से जुड़ाव महसूस होता है, जिससे उनका मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है।

‘एडवांस प्लांट हैबिटेट’: अगली पीढ़ी की तकनीक

वेजी के अलावा NASA ने ‘एडवांस प्लांट हैबिटेट’ (APH) नामक एक और उन्नत सिस्टम विकसित किया है। यह पूरी तरह स्वचालित है और इसमें 180 से अधिक सेंसर लगे हैं, जो लगातार डेटा पृथ्वी पर भेजते हैं। इस सिस्टम में बौनी गेहूं जैसी फसलों का परीक्षण किया जा चुका है। भविष्य में टमाटर, मिर्च और बेरी जैसे पौधे उगाने की योजना है, जो पोषण के साथ-साथ अंतरिक्ष विकिरण से भी कुछ हद तक सुरक्षा दे सकते हैं।

भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों की नींव

स्पेस में खेती सिर्फ वैज्ञानिक प्रयोग नहीं, बल्कि भविष्य के मंगल और चंद्रमा मिशनों की तैयारी है। अगर इंसान को लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहना है, तो उसे भोजन के लिए पृथ्वी पर निर्भरता कम करनी होगी। ‘वेजी’ सिस्टम इस दिशा में एक अहम कदम साबित हो रहा है।

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