नालंदा । बिहार के नालंदा जिले में मंगलवार सुबह शीतला माता मंदिर में भगदड़ मचने से बड़ा हादसा हो गया। इस घटना में 9 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 8 महिलाएं शामिल हैं। महिलाओं की मौके पर ही भीड़ में दबने से मौत हो गई, जबकि एक पुरुष ने अस्पताल में दम तोड़ा।
चैत्र के आखिरी मंगलवार पर उमड़ी भारी भीड़
चैत्र महीने के आखिरी मंगलवार के अवसर पर मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे थे। मंदिर परिसर में मेला भी लगा हुआ था, जिससे भीड़ और अधिक बढ़ गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भीड़ को संभालने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। दर्शन की जल्दी में लोगों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई, जिससे अफरातफरी मच गई और कई लोग भीड़ में दब गए। हादसे में कई लोग घायल भी हुए हैं।
सुरक्षा इंतजामों की भारी कमी
हादसे के समय मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था न के बराबर थी। बताया गया कि लगभग 25 हजार श्रद्धालुओं की भीड़ के बावजूद वहां पुलिस की पर्याप्त तैनाती नहीं थी। इसी दिन नालंदा यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति के दौरे को लेकर 8 जिलों के करीब 2500 जवान तैनात किए गए थे, जबकि मंदिर परिसर में सुरक्षा के इंतजाम बेहद कमजोर रहे।
हादसे के बाद प्रशासनिक कार्रवाई
घटना के बाद मंदिर और मेले को बंद करा दिया गया है। पटना कमिश्नर को बिहार शरीफ भेजा गया है और मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को जांच के निर्देश दिए हैं। दीपनगर थाने के SHO राजमणि को निलंबित कर दिया गया है।
मुआवजे की घोषणा
मुआवजे की घोषणा
राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को 6 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। वहीं केंद्र सरकार ने भी 2 लाख रुपए के मुआवजे का ऐलान किया है।
DGP ने मानी व्यवस्था में कमी
नालंदा पहुंचे DGP विनय कुमार ने स्वीकार किया कि मंदिर परिसर में कई कमियां थीं। उन्होंने कहा कि वहां पुलिस बल की तैनाती जरूरी थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। भीड़ अधिक होने, मंदिर परिसर छोटा होने और लोगों में पहले दर्शन करने की होड़ के कारण हालात बिगड़ गए। लोग कतार में लगने के बजाय आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, जिससे भगदड़ मच गई।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताई पूरी घटना
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताई पूरी घटना
महिला श्रद्धालुओं के अनुसार, चैत्र के आखिरी मंगलवार के कारण भीड़ काफी अधिक थी। मंदिर का गर्भगृह छोटा होने के चलते लोग जल्दी दर्शन के लिए एक-दूसरे से आगे निकलने की कोशिश कर रहे थे। एक अन्य श्रद्धालु ने बताया कि मंदिर में सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं था। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए न तो पुलिस मौजूद थी और न ही कोई उचित व्यवस्था की गई थी। इसी दौरान एक महिला को चक्कर आया और वह गिर पड़ी, जिसके बाद भगदड़ की स्थिति बन गई।
हादसे के पीछे तीन बड़ी लापरवाहियां
1. प्रबंधन की तैयारी नहीं
हर साल इस दिन भारी भीड़ उमड़ती है, इसके बावजूद मंदिर प्रबंधन ने भीड़ नियंत्रण के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए। बैरिकेडिंग तक नहीं की गई थी।
2. पीछे के रास्ते से दर्शन
कुछ लोगों को पैसे लेकर पीछे के दरवाजे से दर्शन कराए जा रहे थे, जिससे अव्यवस्था और नाराजगी बढ़ी।
3. पुलिस-प्रशासन की गैरमौजूदगी
करीब 25 हजार श्रद्धालुओं की भीड़ के बावजूद पुलिस या प्रशासन की पर्याप्त मौजूदगी नहीं थी। मेले की पूर्व जानकारी के बावजूद कोई मजिस्ट्रेट तैनात नहीं किया गया था।