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तेल का ‘खेल’: उत्पादन कहीं, खपत कहीं; कीमतों पर बढ़ा दबाव


नई दिल्ली।
 वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच उत्पादन और खपत का भौगोलिक अंतर फिर चर्चा में है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर तेल बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। यह इलाका दुनिया का प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्र है, जबकि खपत के मामले में एशिया सबसे आगे है। इसी असंतुलन के कारण कीमतों में अस्थिरता बढ़ती जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक तेल बाजार में उत्पादन और खपत अलग-अलग क्षेत्रों में केंद्रित है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बनता है। रिपोर्ट बताती है कि परिवहन क्षेत्र अकेले करीब 40 प्रतिशत तेल की खपत करता है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

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  • सबसे ज्यादा तेल उत्पादन वाले क्षेत्र

    • पश्चिम एशिया – 31%
    • यूरेसिया – 30%
    • उत्तरी अमेरिका – 22%
    • अफ्रीका – 9%
    • यूरोप – 8%

    सबसे अधिक खपत करने वाले क्षेत्र

    • एशिया – 38%
    • उत्तरी अमेरिका – 22%
    • यूरोप – 14%
    • यूरेसिया – 8%
    • अफ्रीका – 6%
    • पश्चिम एशिया – 5%

    रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया में ऊर्जा मांग तेजी से बढ़ रही है, जबकि उत्पादन मुख्य रूप से पश्चिम एशिया और उत्तरी अमेरिका पर निर्भर है। इससे वैश्विक आपूर्ति संतुलन बिगड़ रहा है और कीमतों में तेजी का जोखिम बना हुआ है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान से जुड़े क्षेत्र में तनाव लंबा खिंचता है तो तेल की कीमतों में और उछाल आ सकता है। इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु नीतियों पर पड़ने की आशंका है।

    इसके अलावा, परिवहन क्षेत्र की तेल पर भारी निर्भरता स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेज संक्रमण की जरूरत को भी रेखांकित करती है। जानकारों का कहना है कि उत्पादन और खपत के बीच बढ़ता यह अंतर आने वाले समय में ऊर्जा बाजार को और अस्थिर बना सकता है।

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