रिफंड को हटाने पर शुद्ध संग्रह
यदि 22,074 करोड़ रुपए के रिफंड को हटा दिया जाए, तो मार्च में शुद्ध जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 8.2 प्रतिशत बढ़कर 1,77,990 करोड़ रुपए हो गया। इससे पता चलता है कि कर राजस्व में निरंतर सुधार और बेहतर अनुपालन की स्थिति बनी हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सकल जीएसटी संग्रह 22.27 लाख करोड़ रुपए रहा, जो वित्त वर्ष 2024-25 के 20.55 लाख करोड़ रुपए से 8.3 प्रतिशत अधिक है। शुद्ध जीएसटी संग्रह (रिफंड हटाकर) 19.34 लाख करोड़ रुपए दर्ज किया गया, जो पिछले साल की तुलना में 7.1 प्रतिशत अधिक है।
उपकर संग्रह में गिरावट
हालांकि, उपकर संग्रह में मार्च में नकारात्मक प्रवृत्ति देखी गई और यह -177 करोड़ रुपए पर रहा। इसका मुख्य कारण अधिक रिफंड और समायोजन थे। विशेषज्ञों के अनुसार, जीएसटी संग्रह की यह वृद्धि भारत की अनुमानित जीडीपी वृद्धि (लगभग 7 प्रतिशत) के अनुरूप है, जो बढ़ती खपत, आयात और बेहतर कर अनुपालन का संकेत देती है।
पिछले महीने का प्रदर्शन
फरवरी 2026 में भी जीएसटी संग्रह में 9.1 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई थी। फरवरी में सकल संग्रह बढ़कर 1.84 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचा। इसमें घरेलू जीएसटी राजस्व में 10.2 प्रतिशत और आयात से जीएसटी राजस्व में 5.4 प्रतिशत का योगदान रहा। यह प्रवृत्ति बताती है कि भारत में कर प्रणाली मजबूत होती जा रही है और कर अनुपालन में सुधार हो रहा है।
विशेषज्ञों की राय और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि मार्च और फरवरी में जीएसटी संग्रह की लगातार वृद्धि यह दिखाती है कि भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूत बनी हुई है। घरेलू खपत में बढ़ोतरी, आयात में विस्तार और बेहतर अनुपालन ने कर संग्रह को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। यह संकेत है कि सरकारी राजस्व आधार मजबूत है और देश की वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में मदद मिल रही है।।