पूर्व कुलपति कमलाकर सिंह ने एयरलाइन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी यात्रा के दौरान न केवल लापरवाही बरती गई बल्कि उन्हें मानसिक रूप से भी काफी परेशान किया गया। इस मामले की सुनवाई अब 21 अप्रैल को उपभोक्ता आयोग में तय की गई है जहां दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी।
शिकायत के अनुसार कमलाकर सिंह ने 22 मार्च को रीवा से भोपाल के लिए टिकट बुक कराया था और 26 मार्च की उड़ान के लिए उनका टिकट कन्फर्म था। तय समय पर वे रीवा एयरपोर्ट पहुंच गए लेकिन उन्हें लंबे समय तक इंतजार कराया गया। बाद में एयरलाइन की ओर से तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए फ्लाइट रद्द कर दी गई।
सबसे गंभीर बात यह रही कि एयरलाइन ने यात्रियों को समय रहते कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई। इससे यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। कमलाकर सिंह को मजबूरी में निजी वाहन से करीब 10 से 12 घंटे का लंबा और थकाऊ सफर तय कर भोपाल पहुंचना पड़ा।
इस दौरान उन्हें न केवल शारीरिक कष्ट झेलना पड़ा बल्कि आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि एयरलाइन ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के दिशा निर्देशों का भी पालन नहीं किया जो यात्रियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं।
उपभोक्ता आयोग में दायर इस मामले में सेवा में कमी के साथ साथ मानसिक उत्पीड़न को भी आधार बनाया गया है। यदि आयोग इस मामले में शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला देता है तो यह एयरलाइंस कंपनियों के लिए एक बड़ा संदेश होगा कि यात्रियों की सुविधाओं और अधिकारों की अनदेखी करना महंगा पड़ सकता है।
यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या एयरलाइंस कंपनियां यात्रियों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभा रही हैं या नहीं। अब सभी की नजर 21 अप्रैल को होने वाली सुनवाई पर टिकी हुई है जहां इस पूरे विवाद पर महत्वपूर्ण फैसला आ सकता है।