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टीआरपी का बेताज बादशाह: 'जस्सी जैसी कोई नहीं' ने तोड़े थे सालों पुराने रिकॉर्ड, 9.2 रेटिंग से मचाया था तहलका


नई दिल्ली। भारतीय टेलीविजन के इतिहास में कुछ शोज ऐसे होते हैं जो न केवल मनोरंजन करते हैं, बल्कि एक नए युग की शुरुआत भी करते हैं। सोनी टीवी पर साल 2003 में शुरू हुआ धारावाहिक ‘जस्सी जैसी कोई नहीं’ इसी श्रेणी का एक क्रांतिकारी शो था। अभिनेत्री मोना सिंह ने इस शो में जसमीत वालिया उर्फ जस्सी का किरदार निभाकर घर-घर में अपनी पहचान बनाई। बड़े चश्मे, दांतों में ब्रेसेस और सादगी भरे अंदाज वाली जस्सी ने उस दौर में छोटे पर्दे पर हावी ग्लैमरस और भारी साज-श्रृंगार वाली ‘सास-बहू’ कहानियों के चलन को पूरी तरह बदल दिया था। यह शो कोलंबियाई ड्रामा ‘यो सोय बेटी, ला फिया’ पर आधारित था और इसकी लोकप्रियता का आलम यह था कि इसने टीआरपी के कई पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए थे।

मनोरंजन जगत की खबरों के अनुसार, ‘जस्सी जैसी कोई नहीं’ ने अपनी जबरदस्त सफलता के दौरान 9.2 की टीआरपी रेटिंग हासिल की थी। यह आंकड़ा उस समय के लिहाज से इतना बड़ा था कि इसकी तुलना कई प्रतिष्ठित पौराणिक और पारिवारिक शोज के रिकॉर्ड्स से की गई। इस शो ने यह साबित कर दिया कि दर्शकों को लुभाने के लिए केवल खूबसूरती या ग्लैमर की जरूरत नहीं है, बल्कि एक मजबूत कहानी और प्रभावशाली अभिनय कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। जस्सी का किरदार हर उस आम लड़की की आवाज बन गया जो अपने लुक्स के कारण असुरक्षा महसूस करती थी लेकिन अपने आत्मविश्वास और बुद्धिमानी के बल पर करियर में ऊंचाइयों को छूना चाहती थी।

मोना सिंह के लिए जस्सी का सफर इतना आसान नहीं था। हाल ही में उन्होंने साझा किया कि इस ऐतिहासिक भूमिका को पाने के लिए उन्हें लगभग 50 ऑडिशन देने पड़े थे। वह रोजाना पुणे से मुंबई बस से सफर करती थीं और कड़ी मेहनत के बाद उन्हें यह मौका मिला। शो के मेकर्स ने जस्सी की असल पहचान को काफी समय तक जनता से छिपाकर रखा था ताकि दर्शकों के बीच उत्सुकता बनी रहे। जब पहली बार जस्सी का मेकओवर दिखाया गया, तो वह टीवी जगत की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक बन गई थी। मोना सिंह के शानदार अभिनय ने न केवल आम जनता बल्कि अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान जैसे दिग्गज सितारों का भी दिल जीत लिया था।

आज करीब 23 साल बीत जाने के बाद भी ‘जस्सी जैसी कोई नहीं’ की यादें दर्शकों के जहन में ताजी हैं। 550 एपिसोड वाले इस शो ने अपनी अनूठी कहानी और भावनात्मक गहराई के कारण टेलीविजन पर एक अमिट छाप छोड़ी है। इस धारावाहिक ने मोना सिंह के लिए बॉलीवुड और ओटीटी के रास्ते भी खोले, जहाँ उन्होंने ‘3 इडियट्स’ और ‘कहर’ जैसी परियोजनाओं के माध्यम से अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। यह शो आज भी उन लोगों के लिए एक मिसाल है जो यह मानते हैं कि टीवी पर केवल पारंपरिक फॉर्मूले ही सफल होते हैं।

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