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Amarnath Yatra 2026 : इंदौर में मेडिकल सर्टिफिकेट के लिए ‘अग्निपरीक्षा’, रात 3 बजे से सड़कों पर श्रद्धालु

 
 Amarnath Yatra 2026 : इंदौर मध्य प्रदेश के इंदौर में श्री अमरनाथ यात्रा 2026 को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है, लेकिन मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट बनवाने की अव्यवस्था ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। 29 जून से शुरू होने वाली यात्रा के लिए अनिवार्य मेडिकल सर्टिफिकेट लेने के लिए श्रद्धालुओं को घंटों नहीं, बल्कि पूरी रात इंतजार करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि अस्पताल की खिड़की खुलने से करीब 10 घंटे पहले ही लोग लाइन में लगने को मजबूर हैं, जिससे पूरा सिस्टम चरमराता नजर आ रहा है।

रात 3 बजे से लाइन, फुटपाथ बना इंतजार का ठिकाना

शहर के जिला अस्पताल और अन्य निर्धारित केंद्रों पर भारी भीड़ उमड़ रही है। दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों से आए श्रद्धालु रात 11 बजे से ही अस्पताल परिसर में पहुंचकर डेरा डाल रहे हैं। कई लोग खुले आसमान के नीचे फुटपाथ पर ही रात गुजार रहे हैं। सुबह 3 बजे तक अस्पताल के गलियारे खचाखच भर जाते हैं, जिससे अफरा-तफरी का माहौल बन जाता है। यह स्थिति बताती है कि श्रद्धालुओं की संख्या के मुकाबले व्यवस्थाएं बेहद कम हैं।

महिलाओं पर ज्यादा असर, लाइन में ही नाश्ता

इस अव्यवस्था का सबसे ज्यादा असर महिला श्रद्धालुओं पर पड़ रहा है। लंबी कतारों में घंटों खड़े रहने के कारण महिलाएं लाइन में ही नाश्ता करने को मजबूर हैं। थकान और असुविधा के चलते कई बार खिड़की खुलने से पहले ही विवाद और धक्का-मुक्की की स्थिति बन जाती है। सुरक्षा और सुविधा के लिहाज से भी यह स्थिति चिंता का विषय बन गई है।

सिर्फ दो डॉक्टर, हजारों की भीड़ धीमी प्रक्रिया से बढ़ी नाराजगी

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी भारी भीड़ के बावजूद मेडिकल जांच के लिए केवल दो डॉक्टरों की तैनाती की गई है। इसी कारण पूरी प्रक्रिया बेहद धीमी हो गई है और सैकड़ों श्रद्धालु घंटों इंतजार करने के बाद भी सर्टिफिकेट नहीं बनवा पा रहे। मेडिकल सर्टिफिकेट में देरी के कारण यात्रा पंजीयन भी अटक रहा है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

व्यवस्था पर उठे सवाल, सुधार की मांग तेज

श्रद्धालुओं का कहना है कि एक तरफ सरकार यात्रा को सुगम बनाने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर व्यवस्थाएं पूरी तरह नाकाफी हैं। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि डॉक्टरों की संख्या बढ़ाई जाए, अलग-अलग काउंटर बनाए जाएं और महिलाओं व बुजुर्गों के लिए विशेष व्यवस्था की जाए, ताकि उन्हें इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

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