ईंधन बना महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह
रेटिंग एजेंसी ICRA के वरिष्ठ अर्थशास्त्री Rahul Agrawal के अनुसार, थोक महंगाई में यह बढ़ोतरी व्यापक स्तर पर हुई है, जिसमें क्रूड ऑयल, नेचुरल गैस और ईंधन-ऊर्जा की कीमतों का बड़ा योगदान रहा।
उन्होंने बताया कि फरवरी की तुलना में मार्च में मुख्य महंगाई में 175 बेसिस पॉइंट की वृद्धि हुई, जिसमें करीब 150 बेसिस पॉइंट सिर्फ ईंधन और ऊर्जा सेक्टर से आए।
खाद्य महंगाई स्थिर, गैर-खाद्य में उछाल
मार्च में खाद्य महंगाई दर 1.8% पर स्थिर रही, लेकिन गैर-खाद्य वस्तुओं की महंगाई 3.3% से बढ़कर 3.7% पर पहुंच गई, जो पिछले 41 महीनों का उच्चतम स्तर है। यह संकेत देता है कि उत्पादन और परिवहन लागत बढ़ने से अन्य वस्तुएं महंगी हो रही हैं।
वैश्विक कारणों का असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी, शिपिंग और माल ढुलाई लागत में इजाफा और इनपुट लागत बढ़ने से आयात महंगा हो रहा है। इससे अप्रैल में भी महंगाई बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
डीजल और गैस की कीमतों ने बढ़ाया दबाव
CareEdge Ratings की मुख्य अर्थशास्त्री Rajani Sinha के मुताबिक, पश्चिम एशिया संकट के चलते थोक डीजल और अन्य ईंधनों की कीमतों में तेज उछाल आया है।
मार्च में थोक डीजल की कीमतों में 25% से ज्यादा की वृद्धि हुई, जबकि घरेलू गैस सिलेंडर 60 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर करीब 310 रुपये महंगे हुए।
हालांकि खुदरा पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रहीं, लेकिन थोक स्तर पर बढ़ोतरी का असर उद्योग और परिवहन पर पड़ा।
कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बनी रहेंगी चुनौती
अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में कच्चे तेल की कीमतें औसतन 85-90 डॉलर प्रति बैरल के बीच रह सकती हैं। इससे परिवारों, सरकार और तेल कंपनियों पर वित्तीय दबाव बना रहेगा।
हालांकि मजबूत रिफाइनिंग मार्जिन के कारण कंपनियां 100-105 डॉलर प्रति बैरल तक कीमतों को संभाल सकती हैं।
ब्याज दरों पर क्या होगा असर?
मौजूदा महंगाई और वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि Reserve Bank of India फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा।
अगर आर्थिक विकास दर कमजोर पड़ती है, तो साल के अंत तक दरों में कटौती पर विचार किया जा सकता है, लेकिन फिलहाल “वेट एंड वॉच” की रणनीति अपनाई जा सकती है।