जानकारी के अनुसार आरोपी पंकज चौधरी और मृतक की पत्नी धापुबाई के बीच पिछले करीब पांच वर्षों से प्रेम प्रसंग चल रहा था। इस संबंध की जानकारी जब पति धनराज नाथ को लगी तो उसने इसका विरोध किया और पत्नी को कई बार समझाने की कोशिश की। लेकिन यह बात दोनों को नागवार गुजरी और उन्होंने रास्ते से हटाने के लिए धनराज की हत्या की साजिश रच डाली।
योजना के तहत 10 अप्रैल की शाम पंकज चौधरी मोटरसाइकिल से धनराज के घर पहुंचा और उसे भरोसे में लेकर अपने साथ खेत पर ले गया। वहां पहुंचकर उसने पहले उसका गला घोंटकर हत्या कर दी। इसके बाद सबूत मिटाने के लिए उसने शव के टुकड़े किए और पेट्रोल पंप से डीजल लाकर उसे जला दिया।
इतना ही नहीं आरोपी ने शव को बोरे में भरकर जेसीबी की मदद से गड्ढा खोदकर खेत में दफना दिया ताकि किसी को भनक न लगे। हत्या के बाद भी दोनों आरोपियों ने अपनी चालाकी जारी रखी और भानपुरा थाने पहुंचकर खुद ही धनराज की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी ताकि शक से बचा जा सके।
हालांकि तीन दिन तक जब धनराज का कोई पता नहीं चला तो परिजनों को शक हुआ और उन्होंने पुलिस पर दबाव बनाया। पुलिस ने जब जांच तेज की और मोबाइल लोकेशन व कॉल डिटेल खंगाले तो मामला संदिग्ध लगा। सख्त पूछताछ में पंकज चौधरी ने आखिरकार हत्या की पूरी साजिश कबूल कर ली। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस खेत तक पहुंची और वहां से शव के अवशेष बरामद किए गए। मौके पर एफएसएल टीम ने भी जांच की और साक्ष्य एकत्रित किए गए।
घटना का खुलासा होते ही मृतक के परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने गरोठ भानपुरा मार्ग पर चक्काजाम कर प्रदर्शन किया और आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। परिजन आरोपी के मकान पर बुलडोजर चलाने और मामले की गहन जांच की मांग पर अड़े रहे। करीब 8 घंटे तक चला यह प्रदर्शन प्रशासन के आश्वासन के बाद समाप्त हुआ।
पुलिस ने इस मामले में पंकज चौधरी और धापुबाई के खिलाफ हत्या सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और दोनों से लगातार पूछताछ की जा रही है। यह घटना न केवल एक जघन्य अपराध है बल्कि यह भी दिखाती है कि निजी रिश्तों में उपजे विवाद किस हद तक खतरनाक रूप ले सकते हैं।