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Khilchipur Chintaman Ganesh : खिलचीपुर में चमत्कारिक दृश्य: 300 साल बाद सामने आया भगवान गणेश का असली स्वरूप

 
Khilchipur Chintaman Ganesh : राजगढ़। जिले के खिलचीपुर स्थित रियासतकालीन चिंतामण गणेश मंदिर में सोमवार देर रात एक अनोखी और आस्था से जुड़ी घटना सामने आई, जिसने पूरे क्षेत्र में श्रद्धा और उत्साह का माहौल बना दिया। मंदिर में स्थापित करीब 300 वर्ष पुरानी भगवान गणेश की प्रतिमा ने अचानक अपना पुराना चोला छोड़ दिया, जिसके बाद उसका वास्तविक और दुर्लभ स्वरूप पहली बार स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
चोला हटते ही सामने आया दिव्य स्वरूप
वर्षों से प्रतिमा पर सिंदूर और चोले की परत चढ़ी होने के कारण उसका मूल रूप स्पष्ट नहीं दिखता था। लेकिन चोला उतरते ही भगवान गणेश की चार भुजाओं वाली अद्भुत प्रतिमा सामने आई, जिसे देखकर श्रद्धालु हैरान रह गए।
प्रतिमा के स्वरूप में भगवान गणेश को रुद्राक्ष माला जपते हुए दिखाया गया है। एक हाथ में वे रुद्राक्ष माला धारण किए हुए हैं, दूसरे हाथ से वे सूंड की सहायता से लड्डू ग्रहण कर रहे हैं। तीसरे हाथ में कमल का फूल और चौथे हाथ में फरसा दिखाई देता है। यह दुर्लभ स्वरूप भक्तों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बन गया है।
दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
इस घटना की खबर सुबह होते ही पूरे इलाके में फैल गई। इसके बाद मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दिनभर बड़ी संख्या में लोग इस दिव्य और दुर्लभ स्वरूप के दर्शन करने के लिए पहुंचते रहे।
60 साल पुरानी सेवा परंपरा और मंदिर का इतिहास
स्थानीय श्रद्धालुओं रामबाबू गुप्ता, मोहन गुप्ता और श्याम गुप्ता के अनुसार, यह मंदिर पहले एक कच्चे चबूतरे पर स्थित था। उनके परिवार ने लगभग 60 वर्ष पहले यहां सेवा शुरू की थी और गणेश चतुर्थी पर 10 दिवसीय उत्सव की परंपरा शुरू की, जो आज भी जारी है। बढ़ती श्रद्धालु संख्या को देखते हुए वर्ष 2016 में मंदिर का पुनर्निर्माण तमिलनाडु शैली में किया गया था।
आगे की पूजा और चोले का विसर्जन
मंदिर समिति के अनुसार, आने वाले दिनों में प्रतिमा का जल और पंचामृत से अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद नए चोले और आभूषणों से भगवान का भव्य श्रृंगार किया जाएगा। पुराना चोला ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी में विधिवत रूप से विसर्जित किया जाएगा।
श्रद्धा और आस्था का केंद्र बना मंदिर
इस घटना ने श्रद्धालुओं की आस्था को और गहरा कर दिया है। 300 साल पुरानी इस प्रतिमा के वास्तविक स्वरूप के सामने आने के बाद मंदिर अब पूरे क्षेत्र में आस्था और आकर्षण का बड़ा केंद्र बन गया है।

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