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विदिशा पुलिस की बड़ी सफलता, एक माह में 48 नाबालिग बालिकाएं सुरक्षित मिलीं, ऑपरेशन मुस्कान जारी


नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में पुलिस ने गुमशुदा नाबालिग बालिकाओं की तलाश के लिए चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन मुस्कान’ अभियान के तहत बड़ी सफलता हासिल की है। 1 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक चले विशेष अभियान में 48 नाबालिग बालिकाओं और किशोरियों को सुरक्षित बरामद कर उनके परिजनों को सौंप दिया गया। यह संख्या जिले से दर्ज गुमशुदगी के मामलों से भी अधिक बताई जा रही है, जिससे यह साफ होता है कि पुलिस ने पुराने लंबित मामलों को भी प्राथमिकता से हल किया।

तीन साल में 827 किशोरियों को किया गया सुरक्षित बरामद
विदिशा पुलिस के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में ‘ऑपरेशन मुस्कान’ के तहत कुल 827 गुमशुदा बालिकाओं और किशोरियों को खोजकर उनके परिवारों से मिलाया गया है।

आंकड़ों के अनुसार-

वर्ष 2023 में 226 में से 209 बालिकाएं बरामद की गईं
वर्ष 2024 में 302 में से 282 बालिकाएं सुरक्षित मिलीं
वर्ष 2025 में 271 के मुकाबले 336 बालिकाएं खोजी गईं
वर्ष 2026 (अप्रैल तक) 134 में से 125 बालिकाएं सुरक्षित वापस लाई गईं
इन आंकड़ों से पुलिस की सक्रियता और खोजबीन की व्यापकता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

कई राज्यों तक चला सर्च ऑपरेशन
इस अभियान के दौरान पुलिस ने सिर्फ मध्य प्रदेश तक ही सीमित नहीं रहकर राजस्थान, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश तक तलाशी अभियान चलाया। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम, ग्वालियर, रायसेन और देवास सहित कई जिलों में विशेष टीमों ने लगातार खोजबीन की। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, एसडीओपी, थाना और चौकी प्रभारियों सहित कई टीमों ने समन्वय के साथ यह अभियान चलाया।

पाकिस्तान सीमा तक पहुंची पुलिस टीम
एक मामले में पुलिस टीम एक गुमशुदा किशोरी की तलाश में राजस्थान होते हुए पाकिस्तान सीमा तक पहुंच गई थी। गहन खोजबीन के बाद किशोरी को सुरक्षित बरामद कर वापस लाया गया। यह मामला अभियान की गंभीरता और पुलिस की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

ऑपरेशन मुस्कान का उद्देश्य
पुलिस अधिकारियों के अनुसार ‘ऑपरेशन मुस्कान’ का मुख्य उद्देश्य गुमशुदा बच्चों और किशोरियों को सुरक्षित ढूंढकर उनके परिजनों से मिलाना है। यह अभियान केवल खोजबीन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक जागरूकता और सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है।

विदिशा पुलिस का यह अभियान लगातार प्रभावी साबित हो रहा है। बड़ी संख्या में बालिकाओं की सुरक्षित वापसी ने न केवल परिजनों को राहत दी है, बल्कि पुलिस की सक्रियता और संवेदनशीलता को भी उजागर किया है।

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