Zoho के फाउंडर श्रीधर वेम्बु ने अपने बयान में कहा कि कंपनी का फोकस पूरी तरह से ऑफिस-बेस्ड वर्क मॉडल पर रहेगा। उन्होंने बताया कि खासकर रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) जैसे जटिल कामों में टीम का एक साथ, आमने-सामने बैठकर काम करना ज्यादा प्रभावी साबित होता है।
क्यों लिया गया यह फैसला? सामने आए तकनीकी कारण
श्रीधर वेम्बु के अनुसार, जब टीमें एक ही स्थान पर बैठकर काम करती हैं तो समस्या-समाधान तेजी से होता है और विचारों का आदान-प्रदान बेहतर तरीके से हो पाता है। उन्होंने कहा कि रिमोट वर्क के दौरान कई बार कम्युनिकेशन गैप बढ़ जाता है, जिससे किसी तकनीकी समस्या को हल करने में अधिक समय लगता है।
वेम्बु ने यह भी बताया कि उनके अनुभव में ऑन-साइट टीमवर्क से इनोवेशन और प्रोडक्टिविटी दोनों में सुधार देखने को मिला है। इसी वजह से कंपनी ने निर्णय लिया है कि वह पूर्ण रूप से वर्क फ्रॉम होम मॉडल को अपनाने की योजना नहीं रखती।
पीएम मोदी की अपील क्या थी?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल में वैश्विक ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में तनाव को देखते हुए देशवासियों से ईंधन की बचत करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि लोग यात्रा कम करें, वर्चुअल मीटिंग्स को बढ़ावा दें और कोविड काल जैसी आदतों को फिर से अपनाएं, ताकि देश की ऊर्जा खपत और आयात पर निर्भरता कम की जा सके।
हालांकि Zoho का यह फैसला दिखाता है कि अलग-अलग कंपनियां अपने कामकाज के हिसाब से वर्क मॉडल चुन रही हैं, और हर सेक्टर में रिमोट वर्क पूरी तरह प्रभावी नहीं माना जा रहा है, खासकर तकनीकी और डेवलपमेंट से जुड़े क्षेत्रों में।