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भोजशाला की प्रतिमा की कहानी: 26 कलाकारों ने 35 दिन में तैयार की थी वाग्देवी मूर्ति


नई दिल्ली । मध्यप्रदेश के ग्वालियर में एक ऐसी ऐतिहासिक और भावनात्मक कहानी छिपी है, जो धार की भोजशाला से जुड़ी है। यहां रखी हुई मां वाग्देवी (सरस्वती) की अष्टधातु प्रतिमा पिछले 15 वर्षों से एक घर में सुरक्षित रखी गई है, जिसका निर्माण 2011 में मात्र 35 से 40 दिनों में 26 कलाकारों ने मिलकर किया था।

यह प्रतिमा मूल रूप से धार स्थित भोजशाला के गर्भगृह में स्थापित की जानी थी, लेकिन उस समय उपजे धार्मिक और प्रशासनिक विवाद के कारण इसे वहां नहीं ले जाया जा सका और ग्वालियर में ही रोक दिया गया।

लंदन म्यूजियम वाली प्रतिमा की हूबहू कॉपी
इस प्रतिमा की सबसे खास बात यह है कि इसे लंदन म्यूजियम में रखी मूल मां वाग्देवी की मूर्ति के समान आकार और डिज़ाइन में बनाया गया है।
यह प्रतिमा अष्टधातु (आठ धातुओं के मिश्रण) से बनी है
ऊंचाई लगभग साढ़े 3 फीट और वजन 250 किलो से अधिक है
2011 में इसकी लागत लगभग 2.5 से 3 लाख रुपये आई थी
इसे पूरी तरह पारंपरिक शिल्प और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तैयार किया गया

विवाद के कारण रुक गई प्राण-प्रतिष्ठा
मूर्तिकार प्रभात राय के परिवार के अनुसार, जब 2011 में बसंत पंचमी पर प्रतिमा की स्थापना की तैयारी थी, तभी भोजशाला को लेकर विवाद भड़क गया। सुरक्षा कारणों से प्रशासन ने प्रतिमा को धार भेजने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद कई वर्षों तक हर बसंत पंचमी पर पुलिस सुरक्षा में प्रतिमा को कुछ दिनों के लिए प्रदर्शित किया जाता रहा, लेकिन स्थायी स्थापना कभी नहीं हो सकी।

15 साल से ग्वालियर में सुरक्षा के साये में
इस प्रतिमा को लेकर स्थिति बेहद संवेदनशील रही। शुरुआती वर्षों में मूर्तिकार के घर पर पुलिस सुरक्षा तक तैनात रही। प्रतिमा को आज भी ग्वालियर में सुरक्षित रखा गया है और इसकी देखरेख परिवार कर रहा है। मूर्तिकार परिवार का कहना है कि यह केवल एक मूर्ति नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है।

कोर्ट फैसले के बाद फिर जगी उम्मीद
हाल ही में भोजशाला को लेकर आए कोर्ट के फैसले के बाद इस प्रतिमा को लेकर फिर चर्चा तेज हो गई है। हिंदू पक्ष का कहना है कि मूल प्रतिमा को वापस लाकर भोजशाला में स्थापित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। हालांकि, फिलहाल इस पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

“अगर कोई नहीं ले गया तो मैं इसे रखूंगा” – मूर्तिकार का बयान
मूर्तिकार प्रभात राय के बेटे अनुज राय ने भावुक होकर कहा कि यदि भविष्य में प्रतिमा को भोजशाला ले जाने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती, तो वे इसे अपने पास ही गर्व से सुरक्षित रखेंगे। उनके अनुसार, यह प्रतिमा केवल एक कलाकृति नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है।

लंदन में रखी मूल प्रतिमा पर भी चर्चा
इधर, धार की मूल मां वाग्देवी प्रतिमा के लंदन म्यूजियम में होने को लेकर भी मांगें उठ रही हैं कि उसे भारत लाकर भोजशाला में पुनः स्थापित किया जाए। हिंदू पक्ष का दावा है कि यह प्रतिमा खंडित अवस्था में है, लेकिन धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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