सुबह के समय सेंसेक्स में तेज गिरावट दर्ज की गई और यह कई सौ अंकों की कमजोरी के साथ नीचे कारोबार करता दिखा। इसी तरह निफ्टी में भी गिरावट का रुख बना रहा और यह भी लाल निशान में खुला। विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक स्तर पर कमजोर संकेतों, एशियाई बाजारों में गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भारतीय बाजार पर साफ दिखाई दिया। निवेशकों में अनिश्चितता का माहौल बनने के कारण बिकवाली का दबाव बढ़ गया।
सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी रियल्टी और निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में सबसे ज्यादा कमजोरी देखी गई, जिससे स्पष्ट है कि रियल एस्टेट और सरकारी बैंकों के शेयरों पर दबाव अधिक रहा। इसके अलावा ऑटो, एफएमसीजी, कमोडिटी और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर भी गिरावट की चपेट में रहे। हालांकि कुछ चुनिंदा सेक्टर जैसे फार्मा, हेल्थकेयर और आईटी में हल्की मजबूती देखने को मिली, जिससे बाजार को सीमित सहारा मिला।
मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में भी गिरावट का असर देखने को मिला, जिससे यह संकेत मिला कि बिकवाली केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही बल्कि व्यापक बाजार पर इसका असर पड़ा है। इससे निवेशकों का भरोसा कमजोर होता नजर आया और बाजार में सतर्कता का माहौल बना रहा।
वैश्विक बाजारों की बात करें तो एशिया के प्रमुख बाजारों में भी कमजोरी दर्ज की गई, जिससे घरेलू बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना। जापान, चीन, हांगकांग, दक्षिण कोरिया और इंडोनेशिया जैसे बाजारों में गिरावट का रुख रहा, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार की शुरुआत पर पड़ा। वहीं अमेरिकी बाजार पहले ही बंद थे, जिससे वैश्विक संकेत पूरी तरह से अनिश्चित बने रहे।
कच्चे तेल की कीमतों में भी नरमी देखने को मिली, लेकिन इसका सकारात्मक असर बाजार पर दिखाई नहीं दिया। इसके साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से बिकवाली और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी के बीच संतुलन की कोशिश जरूर दिखी, लेकिन बाजार का दबाव फिर भी बना रहा।
कुल मिलाकर, कमजोर वैश्विक संकेतों, सेक्टरवार दबाव और निवेशकों की सतर्कता के कारण भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का माहौल बना रहा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सत्रों में वैश्विक संकेत और संस्थागत निवेश की दिशा ही बाजार की चाल तय करेगी।