सहकारिता उप आयुक्त परमानंद गोडरिया ने बताया कि वर्षों से निष्क्रिय पड़ी संस्थाओं के कारण विभागीय रिकॉर्ड प्रबंधन और सहकारिता तंत्र दोनों प्रभावित हो रहे थे। ऐसे में अब इन संस्थाओं को सहकारिता पटल से हटाने की प्रक्रिया युद्ध स्तर पर शुरू की गई है। विभाग ने मई 2026 के भीतर पूरी कार्रवाई समाप्त करने का लक्ष्य तय किया है।
कार्रवाई की जद में जिले की कई दुग्ध उत्पादक, साख, बीज और ग्रामीण विकास से जुड़ी सहकारी संस्थाएं शामिल हैं। इनमें पीर गुराडिया, लखमाखेड़ी, फतेहपुर, टिडवास, आंत्रीखुर्द, कांचरिया चन्द्रावत, बोतलगंज, हरमाला, कचनारा, नारायणगढ़, मुवाला, भोलिया, बेलारा, उदपुरा, लामगरा, अर्निया गौड़, कवला, गांगसी, ओसरना, कुण्डला खुर्द, निपानिया, धामनिया झाली, गोपालपुरा, गरोठ, लसुडिया, श्रीनगर, पिपलखुटा, मगराना और डोराना जैसी कई सहकारी समितियां शामिल हैं। इनके अलावा सार्थक साख मंदसौर, ग्रामीण विकास साख संस्था बरखेड़ा देव डूंगरी, कंचन साख मंदसौर, प्रबल निधि साख संस्था, सांवलिया बीज धमनार, जय बालाजी बीज राणाखेड़ा और शिवकृपा बीज मकड़ावन जैसी संस्थाओं पर भी पंजीयन निरस्तीकरण की कार्रवाई प्रस्तावित है।
विभाग की ओर से सभी संबंधित संस्था संचालकों, सदस्यों और पदाधिकारियों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है। यदि किसी संस्था को कार्रवाई पर आपत्ति है या वह अपना पक्ष प्रस्तुत करना चाहती है, तो उन्हें एक सप्ताह के भीतर उपायुक्त सहकारिता कार्यालय, मित्र वत्सला रामटेकरी, मंदसौर में उपस्थित होकर आवेदन देना होगा। तय समय सीमा के बाद विभाग आगे की कानूनी कार्रवाई करेगा।
सहकारिता विभाग का कहना है कि कई संस्थाएं वर्षों से केवल कागजों में चल रही थीं, जबकि उनका कोई वास्तविक संचालन नहीं हो रहा था। इससे न केवल सरकारी रिकॉर्ड प्रभावित हो रहे थे, बल्कि सहकारिता व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी असर पड़ रहा था। विभाग अब सक्रिय और निष्क्रिय संस्थाओं के बीच स्पष्ट अंतर स्थापित कर व्यवस्था को मजबूत करना चाहता है।
प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, आने वाले समय में अन्य निष्क्रिय संस्थाओं की भी समीक्षा की जाएगी। यदि कोई संस्था लंबे समय तक कार्य नहीं करती पाई गई, तो उसके खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी। विभाग का मानना है कि इस अभियान से सहकारिता क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी और सक्रिय संस्थाओं को बेहतर अवसर मिल सकेंगे।