इस विवाद के बीच नॉर्वे की संसद (स्टोर्टिंग) में Akershus क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले भारतीय मूल के सांसद हिमांशु गुलाटी ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। गुलाटी नॉर्डिक क्षेत्र में भारतीय मूल के एकमात्र मौजूदा सांसदों में से एक हैं और राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं।
गुलाटी ने कहा कि नॉर्वे के मीडिया में राजनीतिक कार्टून छापना एक सामान्य परंपरा है, जिसमें वैश्विक नेताओं का व्यंग्यात्मक चित्रण किया जाता है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि इस बार का चित्रण औपनिवेशिक काल की पुरानी रूढ़ियों की याद दिलाता है, जो कई लोगों के लिए संवेदनशील हो सकता है।
उन्होंने कहा कि यह जरूरी नहीं कि कार्टूनिस्ट की मंशा अपमानजनक रही हो, लेकिन यह जरूर दर्शाता है कि कुछ पश्चिमी मीडिया संस्थानों में भारत और उसकी ऐतिहासिक-सांस्कृतिक संवेदनशीलताओं को लेकर समझ की कमी है।
सांसद ने यह भी जोर दिया कि किसी एक कार्टून या संपादकीय टिप्पणी के आधार पर भारत और नॉर्वे के रिश्तों को नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार दोनों देशों के बीच मजबूत कूटनीतिक और संस्थागत संबंध हैं, जो हाल के वर्षों में और बेहतर हुए हैं।
उन्होंने पीएम मोदी को दिए गए नॉर्वे के सम्मान “रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट” का भी उल्लेख किया और कहा कि यह दोनों देशों के बीच मजबूत साझेदारी और आपसी सम्मान को दर्शाता है।
फिलहाल यह मामला नॉर्वे और भारत के बीच सोशल मीडिया पर बहस का विषय बना हुआ है, जहां एक तरफ इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ इसे औपनिवेशिक मानसिकता का उदाहरण बताया जा रहा है।