स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि कई स्थानों पर पानी को लेकर विवाद और मारपीट तक की घटनाएं सामने आ रही हैं। महिलाओं और स्थानीय निवासियों के बीच पानी के हिस्से को लेकर झगड़े हो रहे हैं, जिससे माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है।
नगर निगम के दावों और वास्तविक स्थिति में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, शहर की करीब 15 लाख आबादी के लिए रोजाना लगभग 10 एमसीएफटी पानी की आवश्यकता है, जबकि तिघरा डैम से लगभग 12 एमसीएफटी पानी फिल्टर प्लांट तक पहुंचाया जा रहा है। इसके बावजूद शहर के कई हिस्सों में पानी की आपूर्ति पर्याप्त नहीं हो पा रही है।
कई इलाकों में पिछले कई दिनों से नलों में पानी नहीं आया है, जिससे लोगों को पूरी तरह टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। लेकिन टैंकरों की सीमित उपलब्धता के कारण हर किसी तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे लोगों में नाराजगी और आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
जल संकट का सबसे ज्यादा असर निचले और मध्यम वर्गीय इलाकों में देखा जा रहा है, जहां लोग सुबह से ही खाली बर्तन लेकर पानी के इंतजार में खड़े रहते हैं। कई बार टैंकर आने से पहले ही भीड़ इतनी बढ़ जाती है कि व्यवस्था संभालना मुश्किल हो जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की ओर से समस्या के स्थायी समाधान के बजाय केवल अस्थायी उपाय किए जा रहे हैं। इससे हर साल गर्मियों में स्थिति और खराब हो जाती है।
वहीं नगर निगम के अधिकारियों का दावा है कि पानी की आपूर्ति पर्याप्त मात्रा में की जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात इसके विपरीत दिखाई दे रहे हैं।
Gwalior में जल संकट अब सिर्फ एक प्रशासनिक समस्या नहीं रहा, बल्कि यह आम लोगों के रोजमर्रा के जीवन और आपसी संबंधों को भी प्रभावित करने लगा है।