सुनवाई के दौरान नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने हादसे से जुड़े कई तकनीकी और कानूनी पहलुओं को आयोग के सामने रखा। मंच के अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपांडे और अधिवक्ता वेदप्रकाश अधौलिया ने दलील दी कि इंडियन वेसेल्स एक्ट 2021 के तहत ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो किसी दुर्घटनाग्रस्त जलयान (क्रूज) को जांच पूरी होने से पहले नष्ट करने की अनुमति देता हो।
याचिका में यह भी कहा गया कि जिला प्रशासन ने जांच प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही क्रूज को नष्ट कर दिया, जो नियमों और न्यायिक प्रक्रिया के विपरीत है। मंच ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए कहा कि इससे महत्वपूर्ण साक्ष्य भी नष्ट हो गए, जिससे जांच प्रभावित हो सकती है।
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने 12 सितंबर 2023 के आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जलाशयों में चलने वाले क्रूज में केवल फोर स्ट्रोक इंजन का उपयोग किया जाए। इसके बावजूद दुर्घटनाग्रस्त क्रूज में तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया था और उसमें लगाया गया 100 हॉर्सपावर का इंजन कमजोर बताया जा रहा है। हादसे के समय उसका दूसरा इंजन भी कथित रूप से फेल हो गया था।
याचिका में यह आरोप भी लगाया गया कि क्रूज संचालन के लिए आवश्यक पर्यावरणीय अनुमति और तकनीकी फिटनेस प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं थे। यदि यह सच है, तो यह सीधे तौर पर सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की ओर इशारा करता है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठाया गया कि जब क्रूज को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है, तो अब उसकी तकनीकी जांच किस आधार पर की जाएगी। आयोग के समक्ष यह भी कहा गया कि इससे दुर्घटना के कारणों की वैज्ञानिक जांच लगभग असंभव हो गई है।
आयोग ने इन सभी बिंदुओं को गंभीरता से लेते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए वैधानिक और तकनीकी पहलुओं को जांच में शामिल किया जाएगा। साथ ही आयोग ने निर्देश दिया कि मामले से जुड़े सभी दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएं, ताकि निष्पक्ष जांच की जा सके।
फिलहाल आयोग ने स्पष्ट किया है कि आगामी सुनवाई में सभी पक्षों को पूरा अवसर दिया जाएगा और मामले की गहराई से जांच की जाएगी। यह हादसा अब केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक और तकनीकी लापरवाही के गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है।