खावड़ा स्थित इस परियोजना की संचयी क्षमता अब 3.37 गीगावाट-घंटे तक पहुंच गई है। मार्च 2026 के दौरान इसमें 1.37 गीगावाट-घंटे की अतिरिक्त क्षमता जोड़ी गई, जिससे परियोजना की कुल परिचालन क्षमता में बड़ा विस्तार हुआ। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे देश में नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं का विस्तार हो रहा है, वैसे-वैसे बिजली भंडारण प्रणालियों की जरूरत भी तेजी से बढ़ती जा रही है। सौर और पवन ऊर्जा जैसे स्रोत पर्यावरण के लिहाज से बेहतर विकल्प माने जाते हैं, लेकिन इनकी उपलब्धता प्राकृतिक परिस्थितियों पर निर्भर होती है। ऐसे में बैटरी स्टोरेज सिस्टम अतिरिक्त ऊर्जा को सुरक्षित रखने और जरूरत पड़ने पर उपयोग के लिए उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाते हैं।
कंपनी का मानना है कि बड़े स्तर पर ऊर्जा भंडारण भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन के अगले चरण में निर्णायक भूमिका निभाने वाला है। जैसे-जैसे नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता तेजी से बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौबीसों घंटे भरोसेमंद बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में मजबूत ऊर्जा भंडारण ढांचा भविष्य की बिजली जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। बैटरी स्टोरेज सिस्टम न केवल बिजली संग्रहित करेगा बल्कि ग्रिड स्थिरता को भी मजबूत बनाएगा, जिससे पीक डिमांड के दौरान ऊर्जा उपलब्धता बनाए रखना आसान हो सकेगा।
बताया जा रहा है कि यह विशाल ऊर्जा भंडारण क्षमता लगभग दस लाख घरों को पूरे दिन तक बिजली उपलब्ध कराने में सक्षम है। इसके अलावा यह इंदौर, चंडीगढ़ और पूरे गोवा जैसे क्षेत्रों की उच्चतम बिजली मांग को भी संभाल सकती है। परियोजना की क्षमता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि यह 12 मिलियन से अधिक एलईडी बल्बों को लगातार कई घंटों तक बिजली उपलब्ध कराने में सक्षम है। विशेषज्ञ इसे हरित ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने वाली तकनीक के रूप में देख रहे हैं।
इस परियोजना की एक और बड़ी उपलब्धि इसकी निर्माण गति रही। कंपनी के अनुसार ऑन-साइट निर्माण शुरू होने के केवल दस महीनों के भीतर इस विशाल परियोजना को तैयार कर संचालन में लाया गया। भविष्य की योजनाओं के तहत कंपनी वित्त वर्ष 2027 तक 10 गीगावाट-घंटे से अधिक अतिरिक्त बैटरी स्टोरेज क्षमता जोड़ने और अगले पांच वर्षों में इसे 50 गीगावाट-घंटे तक बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। खावड़ा में विकसित हो रहे विशाल नवीकरणीय ऊर्जा नेटवर्क के साथ यह परियोजना भारत के ऊर्जा भविष्य को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखी जा रही है।