इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (EEPC) इंडिया द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष अप्रैल में यह निर्यात 9.52 अरब डॉलर था। इस बार कई प्रमुख सेक्टर्स में मजबूत मांग और बेहतर प्रदर्शन के कारण निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई।
डेटा के मुताबिक एल्युमीनियम और उससे जुड़े उत्पादों के निर्यात में 38 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि तांबा और उससे संबंधित उत्पादों में 80 प्रतिशत का बड़ा उछाल दर्ज किया गया। इसके अलावा इलेक्ट्रिकल मशीनरी और उपकरणों के निर्यात में 9.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
ऑटोमोबाइल सेक्टर ने भी निर्यात वृद्धि में अहम योगदान दिया। दोपहिया और तिपहिया वाहनों के निर्यात में 36 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जबकि ऑटो कंपोनेंट्स और पार्ट्स के निर्यात में 7.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
EEPC इंडिया के अनुसार, इंजीनियरिंग गुड्स के कुल 34 पैनलों में से 28 ने अप्रैल महीने में सकारात्मक निर्यात वृद्धि दर्ज की, जो सेक्टर की व्यापक मजबूती को दर्शाता है।
ईईपीसी इंडिया के चेयरमैन पंकज चड्ढा ने कहा कि मध्य पूर्व में जारी तनाव और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों के बावजूद अधिकांश क्षेत्रों और बाजारों में भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों की मांग बनी हुई है। उन्होंने कहा कि भारत-ओमान व्यापार समझौते के कारण ओमान को निर्यात में बढ़ोतरी देखने को मिली है।
हालांकि पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका (WANA) क्षेत्र में संघर्ष के कारण निर्यात पर दबाव बना हुआ है। वहीं आसियान देशों में भी मांग कमजोर रहने और ऑटोमोबाइल शिपमेंट में गिरावट के चलते निर्यात अपेक्षाकृत धीमा रहा।
अप्रैल में अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों के प्रमुख बाजार रहे। वहीं चीन को होने वाला निर्यात 81.7 प्रतिशत बढ़कर 301 मिलियन डॉलर से अधिक पहुंच गया।
क्षेत्रीय स्तर पर उत्तरी अमेरिका में 7.1 प्रतिशत और यूरोपीय संघ में 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि यूएई, सिंगापुर और सऊदी अरब को होने वाले निर्यात में गिरावट देखने को मिली।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में देश के कुल व्यापारिक निर्यात में इंजीनियरिंग गुड्स की हिस्सेदारी 23.8 प्रतिशत रही, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 24.9 प्रतिशत थी।