गिरफ्तारी के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उनके उस फैसले को लेकर हो रही है, जो उन्होंने फरवरी 2023 में भोपाल के चर्चित फैज कुरैशी हत्याकांड में सुनाया था। उस मामले में अदालत ने आरोपी शफीक कुरैशी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था।
कोर्ट का फैसला क्यों बना चर्चा का केंद्र
फैसले में अदालत ने स्पष्ट कहा था कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ हत्या का आरोप संदेह से परे साबित नहीं कर सका। सुनवाई के दौरान पेश किए गए प्रत्यक्षदर्शी गवाह अपने बयानों से पलट गए थे। किसी भी गवाह ने अदालत में यह स्वीकार नहीं किया कि उसने आरोपी को वारदात करते देखा।
इसके अलावा, पुलिस द्वारा प्रस्तुत जब्ती और जांच संबंधी साक्ष्यों पर भी सवाल उठे। अदालत ने माना कि केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्य और पुलिस बयानों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। एफएसएल रिपोर्ट भी आरोपी की संलिप्तता को स्पष्ट रूप से साबित नहीं कर सकी थी।
जांच एजेंसियों की कार्रवाई और नई बहस
वर्तमान में ट्विशा शर्मा केस में सीबीआई की जांच जारी है। इसी क्रम में पूर्व जज और उनके परिवार पर कार्रवाई ने न्यायिक व्यवस्था और पुराने मामलों की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने रिमांड मंजूर की है और आगे की जांच जारी है।
इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल कानूनी हलकों में बल्कि राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी बहस छेड़ दी है। एक ओर जहां जांच एजेंसियां मामले को गंभीर बता रही हैं, वहीं दूसरी ओर पुराने फैसलों की निष्पक्षता और न्यायिक प्रक्रिया पर भी चर्चा तेज हो गई है।
ट्विशा केस ने बढ़ाई संवेदनशीलता
ट्विशा शर्मा की मौत 12 मई की रात भोपाल के कटारा हिल्स क्षेत्र में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी। मामले में ससुराल पक्ष इसे आत्महत्या बता रहा है, जबकि मायके पक्ष ने हत्या का आरोप लगाया है। जांच अभी विभिन्न कोणों से जारी है। इसी बीच पूर्व जज की गिरफ्तारी और पुराने फैसले की दोबारा चर्चा ने मामले को और अधिक संवेदनशील और जटिल बना दिया है।