नई दिल्ली । इस सप्ताह घरेलू सर्राफा बाजार में कीमती धातुओं की चमक थोड़ी फीकी पड़ गई है। सोने और चांदी दोनों के दामों में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे निवेशकों और ज्वैलरी बाजार से जुड़े कारोबारियों के बीच हलचल देखने को मिल रही है। पिछले कुछ दिनों में लगातार उतार-चढ़ाव के बाद इस सप्ताह सोना करीब एक हजार रुपये से अधिक और चांदी दो हजार रुपये से ज्यादा सस्ती हो गई है। कीमतों में आई इस नरमी ने उन लोगों के लिए राहत भी दी है जो लंबे समय से खरीदारी की योजना बना रहे थे, जबकि निवेशकों के लिए यह एक अस्थिर संकेत माना जा रहा है।
इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन के ताजा आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत इस सप्ताह लगभग 1,257 रुपये की गिरावट के साथ 1,56,463 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई है। इससे पहले यह स्तर 1,58,720 रुपये प्रति 10 ग्राम के करीब था। इसी तरह 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है, जिससे ज्वैलरी सेगमेंट में कीमतों का दबाव साफ नजर आ रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेतकों में बदलाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव का असर सीधे घरेलू कीमतों पर दिखाई दे रहा है।
इस सप्ताह सोने की कीमतों में दिन-प्रतिदिन उतार-चढ़ाव भी दर्ज किया गया, जहां 25 मई को इसका उच्चतम स्तर देखने को मिला, जबकि 27 मई को इसमें सबसे निचला स्तर दर्ज किया गया। यह दर्शाता है कि बाजार में अस्थिरता बनी हुई है और निवेशक अभी भी सुरक्षित निवेश विकल्पों की तलाश में हैं। दूसरी ओर चांदी के बाजार में भी इसी तरह का रुझान देखने को मिला, जहां कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई।
चांदी की कीमत इस सप्ताह करीब 2,650 रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट के साथ 2,63,350 रुपये पर पहुंच गई है। इससे पहले यह स्तर 2,66,000 रुपये के आसपास था। सप्ताह के दौरान चांदी ने 2,71,100 रुपये के उच्च स्तर और 2,60,917 रुपये के न्यूनतम स्तर को भी छुआ, जो इसकी अस्थिरता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। औद्योगिक मांग और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में बदलाव का प्रभाव चांदी की कीमतों पर अधिक दिखाई देता है, जिसके कारण इसमें उतार-चढ़ाव अपेक्षाकृत तेज रहता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमती धातुओं के भाव में नरमी देखने को मिली है। डॉलर आधारित बाजार में सोना और चांदी दोनों ही अपने हालिया उच्च स्तरों से नीचे आए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, महंगाई को लेकर बनी चिंताएं और भू-राजनीतिक तनाव जैसे कारक कीमती धातुओं की कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं। इसके अलावा कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और वैश्विक व्यापार परिस्थितियां भी इस दबाव में योगदान दे रही हैं।
हालांकि दीर्घकालिक दृष्टि से सोने और चांदी ने निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिया है। पिछले एक वर्ष में इन दोनों धातुओं ने उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए ये अब भी आकर्षक विकल्प बने हुए हैं। मौजूदा गिरावट को बाजार विशेषज्ञ एक अस्थायी सुधार के रूप में भी देख रहे हैं, जो तेजी के लंबे दौर के बाद सामान्य बाजार प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है।
वर्तमान स्थिति में सर्राफा बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है और निवेशक आगे के वैश्विक संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियों और डॉलर की चाल के आधार पर कीमती धातुओं की कीमतों में फिर से बदलाव देखने को मिल सकता है।
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