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कर्नाटक की नई सरकार में किन चेहरों को मिलेगा मंत्री पद, डीके शिवकुमार कैबिनेट को लेकर बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी


नई दिल्ली ।
कर्नाटक की राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन के बाद नई सरकार के गठन को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री पद से Siddaramaiah के इस्तीफे के बाद अब राज्य में नई कैबिनेट को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। सत्ता की बागडोर संभालने की प्रक्रिया के बीच आज शाम चार बजे कांग्रेस विधायक दल की अहम बैठक बुलाई गई है, जिसमें नए नेतृत्व और मंत्रिमंडल के गठन को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने की संभावना है।

सूत्रों के अनुसार, इस नई सरकार का नेतृत्व DK Shivakumar के हाथों में होने की चर्चा तेज है। बताया जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व अनुभव, क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नई कैबिनेट का स्वरूप तय करने की तैयारी में है। संभावित मंत्रियों की सूची भी सामने आई है, जिसमें कई वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ कुछ नए चेहरों को भी जगह दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।

नई कैबिनेट में जिन नामों की चर्चा सबसे अधिक है उनमें यतींद्र सिद्धारमैया, दिनेश गुंडू राव, लक्ष्मी हेब्बालकर, रामलिंगा रेड्डी, रिजवान अरशद और यू.टी. खादर जैसे अनुभवी नेताओं के नाम शामिल हैं। इसके अलावा प्रियंक खरगे जैसे युवा चेहरों को भी मंत्री पद की जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना है। पार्टी संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले Priyank Kharge का नाम भी संभावित सूची में चर्चा में बना हुआ है।

इसके साथ ही G. Parameshwara, एम.बी. पाटिल, कृष्णा बायरेगौड़ा, ईश्वर खंड्रे, के.जे. जॉर्ज, एच.सी. महादेवप्पा और संतोष लाड जैसे वरिष्ठ नेताओं को भी मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावना है। पार्टी का उद्देश्य सभी क्षेत्रों और समुदायों को प्रतिनिधित्व देते हुए एक संतुलित कैबिनेट तैयार करना बताया जा रहा है।

इधर, कांग्रेस संगठन के शीर्ष नेतृत्व में भी लगातार बैठकों का दौर जारी है। एआईसीसी महासचिव और कर्नाटक प्रभारी Randeep Singh Surjewala की मौजूदगी में होने वाली आज की बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। बैठक में सभी विधायक, एमएलसी और सांसदों को शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं ताकि नए नेतृत्व के चयन और मंत्रिमंडल विस्तार पर अंतिम सहमति बनाई जा सके।

सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व इस बात पर जोर दे रहा है कि नई कैबिनेट में अनुभव और युवा नेतृत्व का संतुलन बनाए रखा जाए। इसके साथ ही प्रशासनिक दक्षता और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को भी प्राथमिकता दी जा रही है। माना जा रहा है कि बैठक के बाद ही नए मंत्रिमंडल की तस्वीर लगभग साफ हो जाएगी और अगले चरण में शपथ ग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

राजनीतिक हलकों में इस बदलाव को कर्नाटक की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जहां सत्ता संतुलन और संगठनात्मक रणनीति दोनों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। अब सबकी नजर आज शाम होने वाली विधायक दल की बैठक पर टिकी हुई है, जो नई सरकार की दिशा तय कर सकती है।

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