इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि गिरोह का मास्टरमाइंड विवेक प्रजापति कंप्यूटर इंजीनियरिंग का छात्र रहा है। पुलिस के अनुसार, जल्दी और अधिक पैसा कमाने की चाह में उसने अपराध का रास्ता चुना और तकनीक का इस्तेमाल करते हुए एक संगठित गिरोह तैयार कर लिया। गिरोह के सदस्य बेहद सुनियोजित तरीके से सूने मकानों को निशाना बनाते थे और पुलिस की निगरानी से बचने के लिए आधुनिक तकनीकों का सहारा लेते थे।
मामले की शुरुआत 5 मई 2026 को हुई थी, जब इंदरगंज क्षेत्र निवासी अजय शंकर मित्तल के घर में चोरी की बड़ी वारदात हुई। मकान सूना होने का फायदा उठाकर चोरों ने ताला तोड़ा और लाखों रुपए के जेवरात तथा अन्य कीमती सामान लेकर फरार हो गए। शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने में सफलता हासिल की।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि गिरोह का सरगना विवेक प्रजापति अपने साथियों और परिजनों से संपर्क करने के लिए सामान्य फोन कॉल या मैसेजिंग एप का इस्तेमाल नहीं करता था। वह इंस्टाग्राम कॉल और सीक्रेट चैट फीचर का उपयोग करता था, ताकि उसकी बातचीत को ट्रैक करना मुश्किल हो सके। गिरफ्तारी के बाद भी उसने करीब 48 घंटे तक पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन उसके साथी फरहान खान से मिली जानकारी ने पूरे नेटवर्क की परतें खोल दीं।
आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस पनिहार टोल प्लाजा के आगे बीहड़ क्षेत्र में पहुंची, जहां चोरी का माल जमीन में गाड़कर और पत्थरों के नीचे छिपाकर रखा गया था। यहां से बड़ी मात्रा में सोना और चांदी बरामद की गई। पुलिस ने चोरी के गहने खरीदने के आरोप में एक सराफा कारोबारी विवेक सोनी को भी गिरफ्तार किया है।
सीएसपी रोबिन जैन के मुताबिक अब तक गिरोह के कई सदस्य पुलिस गिरफ्त में आ चुके हैं। इनमें मास्टरमाइंड विवेक प्रजापति, फरहान खान, आकाश माहौर, मयूर राठौर, एक नाबालिग आरोपी और चोरी का माल खरीदने वाला सुनार शामिल हैं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लगभग 300 ग्राम सोना, साढ़े 14 किलो चांदी तथा चोरी की रकम से खरीदी गई आई-20 कार जब्त की है।
पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य संभावित अपराधों और नेटवर्क की जांच कर रही है। माना जा रहा है कि आरोपियों ने शहर और आसपास के क्षेत्रों में कई अन्य वारदातों को भी अंजाम दिया हो सकता है।