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राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को पत्र, कहा- क्रॉस वोटिंग का खतरा, फिर भी हो रही बड़ी भूल


मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस द्वारा Meenakshi Natarajan को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और भोपाल की हुजूर विधानसभा सीट से दो बार प्रत्याशी रह चुके Naresh Gyanchandani ने इस फैसले पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाते हुए पार्टी नेतृत्व को बड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कांग्रेस के शीर्ष नेताओं Rahul Gandhi और Priyanka Gandhi Vadra को संबोधित करते हुए कहा कि राज्यसभा उम्मीदवार के चयन में पार्टी से गंभीर चूक हुई है और इससे क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ सकता है।

सोशल मीडिया पर जताई नाराजगी
नरेश ज्ञानचंदानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि उन्होंने पहले भी पार्टी नेतृत्व को आगाह किया था कि मध्य प्रदेश में राज्यसभा उम्मीदवार का चयन बेहद सावधानी से किया जाए। उनका दावा है कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में कांग्रेस के सामने क्रॉस वोटिंग की चुनौती बनी हुई है और ऐसे समय में उम्मीदवार चयन को लेकर व्यापक सहमति जरूरी थी। ज्ञानचंदानी ने लिखा कि यदि किसी ऐसे नेता को उम्मीदवार बनाया जाता, जिसकी संगठन और विधायकों पर मजबूत पकड़ हो, तो पार्टी की सीट अधिक सुरक्षित रहती।

दिग्विजय सिंह के पक्ष में खुली पैरवी
अपने बयान में ज्ञानचंदानी ने स्पष्ट रूप से Digvijaya Singh का नाम लेते हुए कहा कि अगर उन्हें दोबारा राज्यसभा उम्मीदवार बनाया जाता तो कांग्रेस की सीट पूरी तरह सुरक्षित रहती। उनके अनुसार दिग्विजय सिंह का प्रदेश के विधायकों और संगठन पर प्रभाव है, जिससे किसी भी प्रकार की क्रॉस वोटिंग की आशंका कम हो सकती थी। ज्ञानचंदानी का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उन्हें लंबे समय से दिग्विजय सिंह समर्थक नेता के रूप में देखा जाता है। ऐसे में उनका खुला विरोध कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में नए संकेत दे रहा है।

कांग्रेस के भीतर बढ़ी हलचल
मीनाक्षी नटराजन के नाम की घोषणा के बाद पार्टी के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच असहमति की चर्चाएं पहले से चल रही थीं, लेकिन अब पहली बार किसी वरिष्ठ नेता ने सार्वजनिक मंच पर फैसले का विरोध किया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव में संख्या बल के लिहाज से कांग्रेस की स्थिति पहले ही चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में पार्टी के भीतर असंतोष के सार्वजनिक होने से नेतृत्व की चिंता बढ़ सकती है।

बीजेपी ने साधा निशाना
कांग्रेस में उभरे इस विवाद पर बीजेपी ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी Ashish Agrawal ने कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान पर तंज कसते हुए कहा कि अंतर्कलह और गुटबाजी कांग्रेस की पुरानी पहचान रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब पार्टी के अपने नेता ही शीर्ष नेतृत्व के फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं और क्रॉस वोटिंग की आशंका जता रहे हैं, तो यह कांग्रेस के भीतर बढ़ती असहमति का संकेत है। भाजपा ने इसे संगठनात्मक कमजोरी बताते हुए कांग्रेस पर राजनीतिक हमला भी बोला।

राज्यसभा चुनाव से पहले बढ़ा सियासी तापमान
मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस जहां अपने उम्मीदवार के पक्ष में एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रही है, वहीं पार्टी के भीतर से उठ रहे विरोध के स्वर नेतृत्व के लिए नई चुनौती बन सकते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इस असंतोष को किस तरह संभालती है और क्या पार्टी अपने विधायकों को एकजुट रखने में सफल हो पाती है।

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