विदेश मंत्रालय की साप्ताहिक ब्रीफिंग के दौरान भारत ने पाकिस्तान के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि भारत चिनाब नदी के जल प्रवाह से जुड़े ऐसे कदम उठा रहा है जो सिंधु जल संधि के प्रावधानों के खिलाफ हैं। भारत ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि पाकिस्तान तथ्यों से परे जाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहा है।
हाल के दिनों में पाकिस्तान ने आरोप लगाया था कि भारत चिनाब नदी के जल को दूसरी दिशा में मोड़ने की संभावित योजनाओं पर काम कर रहा है, जिससे सिंधु जल संधि प्रभावित हो सकती है। पाकिस्तान ने इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों और द्विपक्षीय समझौतों के उल्लंघन के रूप में प्रस्तुत किया। हालांकि भारत ने इन दावों को स्वीकार करने से इनकार करते हुए कहा कि संधि के भविष्य को लेकर उसका निर्णय सुरक्षा परिस्थितियों और आतंकवाद से जुड़े व्यवहार पर निर्भर करेगा।
भारत का कहना है कि सीमा पार से लगातार आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन मिलने के कारण दोनों देशों के बीच विश्वास का माहौल कमजोर हुआ है। ऐसे में सामान्य द्विपक्षीय व्यवस्थाओं को पहले की तरह जारी रखना संभव नहीं है। सरकार का मानना है कि जब तक आतंकवाद के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय कार्रवाई नहीं दिखाई देती, तब तक किसी भी संवेदनशील समझौते पर आगे बढ़ना कठिन होगा।
सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच जल संसाधनों के उपयोग को नियंत्रित करने वाला एक महत्वपूर्ण समझौता है। यह समझौता दशकों से दोनों देशों के बीच जल बंटवारे की व्यवस्था का आधार रहा है। हालांकि हाल के वर्षों में सुरक्षा संबंधी तनाव और सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे ने इस समझौते को भी राजनीतिक और कूटनीतिक बहस का विषय बना दिया है।
भारत ने यह भी संकेत दिया है कि राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा से जुड़े मामलों में वह किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। सरकार का मानना है कि आतंकवाद और सहयोग एक साथ नहीं चल सकते। इसी वजह से संधि को लेकर उठाए गए कदमों को सुरक्षा परिस्थितियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
इस बीच भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर भी सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। दोनों देशों के बीच हालिया वार्ताओं में आर्थिक सहयोग को मजबूत बनाने और व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देने पर चर्चा हुई है। अधिकारियों का कहना है कि वार्ता रचनात्मक रही है और आने वाले समय में इस दिशा में और प्रगति देखने को मिल सकती है।
फिलहाल सिंधु जल संधि को लेकर भारत का संदेश स्पष्ट है। सरकार ने संकेत दिया है कि जब तक आतंकवाद के मुद्दे पर ठोस बदलाव नहीं दिखता, तब तक इस समझौते की बहाली की संभावना सीमित रहेगी। ऐसे में आने वाले समय में भारत-पाकिस्तान संबंधों और क्षेत्रीय कूटनीति पर इस मुद्दे का प्रभाव बना रह सकता है।