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मिर्गी के दौरे में जूता या मोजा सुंघाना इलाज नहीं, जानिए क्या है सच्चाई और सही फर्स्ट एड


नई दिल्ली । भारत में आज भी मिर्गी के दौरे को लेकर कई तरह की भ्रांतियां और घरेलू मान्यताएं प्रचलित हैं। जब किसी व्यक्ति को अचानक मिर्गी का दौरा पड़ता है तो आसपास मौजूद लोग अक्सर उसे जूता, चप्पल या मोजा सुंघाने लगते हैं। कुछ लोग मरीज के मुंह में चम्मच डालने या पानी पिलाने की भी कोशिश करते हैं। पीढ़ियों से चली आ रही इन मान्यताओं को कई लोग उपचार का हिस्सा मानते हैं, लेकिन चिकित्सा विज्ञान इन तरीकों को पूरी तरह गलत और गैर-वैज्ञानिक बताता है।

मिर्गी, जिसे चिकित्सकीय भाषा में Epilepsy कहा जाता है, दिमाग से जुड़ी एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है। इसमें मस्तिष्क की विद्युत गतिविधियां अचानक असामान्य हो जाती हैं, जिससे मरीज को झटके आने, बेहोशी, शरीर अकड़ने या कुछ समय तक एकटक देखने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यह बीमारी किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार मिर्गी का दौरा पड़ने पर जूता या मोजा सुंघाने की परंपरा का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। अधिकांश मामलों में मिर्गी का दौरा कुछ सेकंड से लेकर एक-दो मिनट के भीतर अपने आप समाप्त हो जाता है। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति को दौरे के दौरान जूता या मोजा सुंघाया जाए और थोड़ी देर बाद वह सामान्य हो जाए, तो लोग यह मान लेते हैं कि वह इसी कारण ठीक हुआ है। जबकि वास्तविकता यह है कि दौरा अपने प्राकृतिक समय के अनुसार समाप्त हुआ होता है।

डॉक्टर बताते हैं कि मिर्गी के दौरान दिमाग की तंत्रिका कोशिकाएं यानी न्यूरॉन्स एक साथ अत्यधिक इलेक्ट्रिकल सिग्नल भेजने लगती हैं। इससे मस्तिष्क का सामान्य कार्य कुछ समय के लिए बाधित हो जाता है और व्यक्ति को दौरा पड़ सकता है। इस प्रक्रिया पर जूते, चप्पल या मोजे की गंध का कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

मिर्गी के कई कारण हो सकते हैं। सिर पर गंभीर चोट लगना, स्ट्रोक, दिमाग में संक्रमण, ऑक्सीजन की कमी, ब्रेन ट्यूमर, तेज बुखार, ब्लड शुगर का अत्यधिक कम या ज्यादा होना तथा कुछ मामलों में आनुवंशिक कारण भी इसके पीछे जिम्मेदार हो सकते हैं।

मिर्गी के दौरे के दौरान मरीज में कई तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इनमें अचानक बेहोश हो जाना, हाथ-पैरों में तेज झटके आना, शरीर अकड़ जाना, मुंह से झाग निकलना, जबड़े का जकड़ जाना, चक्कर खाकर गिरना या कुछ सेकंड तक बिना प्रतिक्रिया दिए एक दिशा में देखते रहना शामिल है। दौरे के बाद व्यक्ति भ्रमित या अत्यधिक थका हुआ महसूस कर सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मिर्गी के दौरे के दौरान घबराने के बजाय सही प्राथमिक उपचार देना सबसे जरूरी है। मरीज को सुरक्षित स्थान पर करवट के बल लिटाना चाहिए ताकि मुंह में जमा लार या झाग बाहर निकल सके और सांस लेने में दिक्कत न हो। उसके आसपास मौजूद नुकीली या खतरनाक वस्तुओं को हटा देना चाहिए ताकि चोट का खतरा न रहे। यदि कपड़े बहुत तंग हों तो उन्हें ढीला कर देना चाहिए।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मरीज के मुंह में कोई वस्तु नहीं डालनी चाहिए और न ही जबरन पानी पिलाने की कोशिश करनी चाहिए। यदि दौरा पांच मिनट से अधिक समय तक जारी रहे या बार-बार दौरे पड़ें, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना आवश्यक है।

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