सत्तारूढ़ दल झारखंड मुक्ति मोर्चा के महासचिव विनोद पांडेय द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किए गए ’56 नहीं, 61′ के नारे ने चुनावी समीकरणों को पूरी तरह से रहस्यमयी बना दिया है। राजनीतिक गलियारों में इस संक्षिप्त लेकिन प्रभावी संदेश के कई तरह के मायने निकाले जा रहे हैं। वर्तमान संख्या बल के हिसाब से देखा जाए तो विधानसभा में इंडिया गठबंधन के पास कुल छप्पन विधायक मौजूद हैं, जो दोनों सीटों पर अपने प्रत्याशियों को जिताने के लिए पूरी तरह से पर्याप्त हैं। ऐसे में महासचिव के इस दावे के बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि महागठबंधन विपक्ष के कुछ विधायकों को अपने पाले में लाने में सफल हो चुका है।
संख्या बल के वास्तविक समीकरणों पर नजर डालें तो इक्यासी सदस्यीय झारखंड विधानसभा में इंडिया गठबंधन के पास वर्तमान में कुल छप्पन विधायकों का मजबूत समर्थन हासिल है। इस कुनबे में झारखंड मुक्ति मोर्चा के चौंतीस, कांग्रेस के सोलह, राष्ट्रीय जनता दल के चार और सीपीआई एमएल के दो विधायक शामिल हैं। दूसरी तरफ, एनडीए गठबंधन के पाले में कुल चौबीस विधायक हैं, जबकि एक विधायक निर्दलीय चुनाव जीतकर सदन में पहुंचे हैं। नियम के अनुसार, एक राज्यसभा सीट पर सीधे तौर पर जीत दर्ज करने के लिए किसी भी प्रत्याशी को कम से कम अट्ठाईस प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता होती है।
गणित के इस खेल में महागठबंधन को अपनी दोनों सीटों पर प्रणव झा और वैद्यनाथ राम को सुरक्षित रूप से राज्यसभा भेजने के लिए कुल छप्पन वोटों की जरूरत है, जो उनके पास पहले से ही उपलब्ध हैं। वहीं, एनडीए द्वारा समर्थित प्रत्याशी परिमल नथवानी की राह थोड़ी मुश्किल नजर आ रही है। एनडीए के पास अपने केवल चौबीस वोट हैं और उन्हें जीत की दहलीज पार करने के लिए चार और अतिरिक्त मतों की दरकार है। शुरुआत में कयास लगाए जा रहे थे कि एनडीए विपक्षी खेमे के असंतुष्ट विधायकों में सेंध लगाकर यह जादुई आंकड़ा हासिल कर सकता है, लेकिन जेएमएम के नए नारे ने पासा पलट दिया है।
अब चर्चा इस बात की है कि महागठबंधन खुद एनडीए के पांच विधायकों को अपने पक्ष में मतदान कराने के लिए तैयार कर चुका है, जिससे उनका आंकड़ा छप्पन से बढ़कर इकसठ तक पहुंच सकता है। इस संभावित क्रॉस वोटिंग के डर ने दोनों ही खेमों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। राज्य में रिसॉर्ट और होटल पॉलिटिक्स एक बार फिर सक्रिय हो गई है, जहां विधायकों को एकजुट रखने के लिए गुप्त रणनीतियां बनाई जा रही हैं और मॉक पोल के जरिए मतदान का अभ्यास कराया जा रहा है। मतदान की प्रक्रिया सुबह से शुरू होकर शाम तक चलेगी, जिसके तुरंत बाद आने वाले परिणाम ही इस नए नारे के वास्तविक सच और झारखंड की भविष्य की राजनीति की दिशा तय करेंगे।