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“साहब, ये मुझे मार डालेगा…” ट्रस्टी की चेतावनी हुई सच, एक महीने बाद चौकीदार ने ली जान


मध्य प्रदेश । इंदौर के अन्नपूर्णा थाना क्षेत्र स्थित 150 साल पुराने बारामत्था बगीची शिव-हनुमान मंदिर के ट्रस्टी कैलाश चंद्र मोदी की निर्मम हत्या ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। 70 वर्षीय कैलाश मोदी की मौत केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और अनदेखी का ऐसा मामला बन गई है, जिसमें पीड़ित ने अपनी जान को खतरा होने की आशंका पहले ही जाहिर कर दी थी। दुखद बात यह रही कि उनकी चेतावनियों को गंभीरता से नहीं लिया गया और आखिरकार वही हुआ, जिसका डर उन्हें लगातार सता रहा था।

परिजनों के अनुसार कैलाश मोदी पिछले कई महीनों से मंदिर परिसर के चौकीदार मुकेश शर्मा की गतिविधियों से परेशान थे। उन्होंने पुलिस कमिश्नर, कलेक्टर, एसीपी और थाना प्रभारी सहित कई अधिकारियों को लिखित शिकायतें देकर बताया था कि आरोपी मंदिर परिसर में अवैध कब्जा करने की कोशिश कर रहा है और विरोध करने पर उन्हें जान से मारने की धमकियां देता है। 13 मई को दिए गए आवेदन में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि आरोपी कभी भी उनकी हत्या कर सकता है।

बताया जाता है कि मुकेश शर्मा पर पहले से ही मारपीट, धमकी, अवैध हथियार रखने और अवैध वसूली जैसे पांच आपराधिक मामले दर्ज थे। इसके बावजूद वह लगातार खुलेआम घूमता रहा। पुलिस ने उसके खिलाफ बाउंड ओवर और जिलाबदर की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन वह कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी। इसी बीच आरोपी की गुंडागर्दी और बढ़ती गई।

कैलाश मोदी ने केवल एक-दो नहीं, बल्कि करीब 40 शिकायतें विभिन्न विभागों को सौंपी थीं। उन्होंने मंदिर परिसर में शराबखोरी, जुआ-सट्टा, अवैध गतिविधियों और कब्जे के प्रयासों की जानकारी भी प्रशासन को दी थी। दिसंबर 2025 में आरोपी ने मंदिर परिसर में ही कैलाश मोदी पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया था। उस समय भी मामला दर्ज हुआ, लेकिन सख्त कार्रवाई नहीं हुई। यही कारण रहा कि आरोपी के हौसले लगातार बुलंद होते गए।

मंगलवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे आरोपी मुकेश शर्मा कथित तौर पर नशे की हालत में मंदिर पहुंचा। वहां किसी बात को लेकर विवाद हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के मुताबिक जब कैलाश मोदी ने उसे समझाने का प्रयास किया तो वह आक्रामक हो गया और डंडा लेकर उनके पीछे दौड़ पड़ा। जान बचाने के लिए मोदी पास स्थित गुरुद्वारे की ओर भागे, लेकिन आरोपी ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। उसने ताबड़तोड़ डंडों से हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया।

घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें आरोपी लगातार बुजुर्ग ट्रस्टी पर हमला करता दिखाई दे रहा है। गंभीर रूप से घायल कैलाश मोदी को अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि पुलिस और प्रशासन ने समय रहते शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई की होती तो आज कैलाश मोदी जीवित होते।

अब पुलिस हत्या के मामले की जांच कर रही है और मृतक द्वारा पहले की गई शिकायतों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है। लेकिन यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि जब कोई नागरिक अपनी जान को खतरा बताते हुए बार-बार गुहार लगाता है, तब उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है।

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