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NEET UG पुनर्परीक्षा पर सुप्रीम कोर्ट का रुख साफ, CJI सूर्यकांत बोले- मामला पहले से दूसरी बेंच के समक्ष लंबित

नई दिल्ली । राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट यूजी) को लेकर जारी विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्परीक्षा के खिलाफ दायर एक नई याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। याचिका में कहा गया था कि कथित पेपर लीक की घटनाएं कुछ सीमित परीक्षा केंद्रों और व्यक्तियों तक सीमित थीं, इसलिए पूरे देश के लगभग 22 लाख अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा देने के लिए बाध्य करना उचित नहीं है। हालांकि मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मामले पर अलग से सुनवाई करने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि नीट से जुड़े सभी मामले पहले से एक अन्य पीठ के समक्ष लंबित हैं और यही याचिका भी उसी पीठ के सामने रखी जा सकती है।

इस वर्ष 3 मई को आयोजित नीट यूजी परीक्षा के बाद कई राज्यों से पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। इन आरोपों के बाद परीक्षा की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हुए। मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और कानूनी बहस का रूप ले लिया, जिसके बाद परीक्षा रद्द कर दी गई और दोबारा परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया गया। अब पुनर्परीक्षा 21 जून को आयोजित की जानी है।

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल नई याचिका में तर्क दिया गया कि कथित गड़बड़ियां सीमित दायरे में थीं और पूरे देश के छात्रों को पुनर्परीक्षा के लिए मजबूर करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता। याचिकाकर्ता ने अदालत से पुनर्परीक्षा के फैसले की समीक्षा करने और प्रभावित छात्रों की स्थिति पर विचार करने की मांग की थी। लेकिन मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस विषय से संबंधित सभी मामलों पर न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ पहले से सुनवाई कर रही है। ऐसे में नई याचिका पर अलग से विचार करना उचित नहीं होगा।

नीट परीक्षा विवाद को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में पहले से कई याचिकाएं लंबित हैं। इनमें परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता बढ़ाने, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली की समीक्षा करने और एजेंसी के पुनर्गठन जैसी मांगें भी शामिल हैं। इन मामलों की सुनवाई आने वाले महीनों में जारी रहने की संभावना है और इनके परिणाम भविष्य की परीक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं।

इस बीच परीक्षा प्रणाली में बदलाव की मांग को लेकर दायर एक अन्य याचिका पर भी अदालत पहले अपना रुख स्पष्ट कर चुकी है। 1 जून को दायर याचिका में पेन-पेपर मोड के बजाय कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली लागू करने की मांग की गई थी। अदालत ने उस याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि परीक्षा आयोजन में अब बहुत कम समय बचा है और अंतिम समय में इतनी बड़ी व्यवस्था परिवर्तन करना व्यावहारिक नहीं होगा।

न्यायालय ने यह भी माना था कि परीक्षा रद्द होने के बाद दोबारा आयोजन अपने आप में एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती है। लाखों छात्रों के लिए नए सिरे से परीक्षा आयोजित करना, केंद्रों की व्यवस्था करना और सुरक्षा सुनिश्चित करना पहले ही परीक्षा अधिकारियों के लिए कठिन कार्य है। ऐसे में अतिरिक्त निर्देश या नए बदलाव तैयारियों को प्रभावित कर सकते हैं।

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा मानी जाने वाली नीट यूजी के माध्यम से लाखों छात्र मेडिकल और डेंटल पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्राप्त करते हैं। इसलिए परीक्षा से जुड़े हर निर्णय का सीधा प्रभाव छात्रों के भविष्य पर पड़ता है। फिलहाल 21 जून को प्रस्तावित पुनर्परीक्षा की तैयारियां जारी हैं, जबकि परीक्षा रद्द करने, पेपर लीक, परीक्षा प्रबंधन और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की भूमिका से जुड़े व्यापक मुद्दों पर संबंधित पीठ जुलाई में आगे सुनवाई करेगी। छात्रों, अभिभावकों और शैक्षणिक संस्थानों की निगाहें अब उसी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस बहुचर्चित विवाद की आगे की दिशा तय हो सकती है।

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