राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था का आधार उसके वीर सैनिक हैं जो अपने जीवन को जोखिम में डालकर देश की रक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि मेडल ऑफ ऑनर उन चुनिंदा लोगों को मिलता है जिन्होंने युद्ध के मैदान में असाधारण बहादुरी दिखाई है। इस अवसर पर उन्होंने तीनों सैनिकों के योगदान को प्रेरणादायक बताया और कहा कि उनका साहस आने वाली पीढ़ियों के लिए मिसाल है।
जेम्स कैपर्स जूनियर को 1967 में वियतनाम युद्ध के दौरान किए गए एक जोखिम भरे टोही मिशन के लिए यह सम्मान दिया गया। उस समय वे सेकंड लेफ्टिनेंट थे और उनकी टीम को दुश्मन के बड़े ठिकाने की जानकारी जुटाने का कार्य सौंपा गया था। मिशन के दौरान उनकी यूनिट पर लगातार हमले हुए और कई सैनिक घायल हो गए। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैपर्स ने नेतृत्व संभाले रखा और अपने साथियों को सुरक्षित निकालने की रणनीति तैयार की। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी हवाई सहायता का समन्वय किया और अपने मिशन को पूरा करने की कोशिश जारी रखी।
मरीन कर्नल जॉन डब्ल्यू रिप्ले को यह सम्मान मरणोपरांत दिया गया। वर्ष 1972 में उत्तरी वियतनाम के हमले के दौरान उन्होंने एक महत्वपूर्ण पुल को नष्ट करने का साहसिक निर्णय लिया ताकि आगे बढ़ रही दुश्मन सेना को रोका जा सके। भारी गोलाबारी के बीच उन्होंने विस्फोटक सामग्री स्थापित की और लगातार कई घंटों तक जोखिम उठाते रहे। उनके इस कार्य ने दुश्मन की रणनीति को विफल कर दिया और कई सैनिकों की जान बचाई।
दूसरी ओर मेजर निकोलस डॉकरी को 2012 में अफगानिस्तान के कपिसा प्रांत में हुए संघर्ष के दौरान उनके अद्वितीय साहस के लिए सम्मानित किया गया। तालिबान के हमले के बीच उन्होंने घायल साथियों की जान बचाने के लिए स्वयं को खतरे में डाला। उन्होंने न केवल मोर्चे पर नेतृत्व किया बल्कि अपने घायल साथी को बचाने के लिए अपने शरीर से सुरक्षा कवच की तरह कार्य किया। उनकी बहादुरी ने युद्ध के मैदान में एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया।
समारोह के अंत में राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका अपने उन नायकों का सदैव ऋणी रहेगा जिन्होंने देश के लिए अपना जीवन दांव पर लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि जब देश अपनी स्थापना की 250वीं वर्षगांठ की ओर बढ़ रहा है तब ऐसे वीरों का सम्मान और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।