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तुलसी गबार्ड ने जारी किए कोविड बायोलैब्स दस्तावेज, एंथनी फौसी पर खुफिया जानकारी प्रभावित करने के गंभीर आरोप

नई द‍िल्‍ली । अमेरिका में कोविड-19 महामारी की उत्पत्ति को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस बार राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड द्वारा कुछ ऐसे दस्तावेज सार्वजनिक किए गए हैं, जिन्हें पहले प्रतिबंधित और वर्गीकृत माना जाता था। इन दस्तावेजों के सामने आने के बाद अमेरिका की वैज्ञानिक, खुफिया और राजनीतिक संस्थाओं की भूमिका पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।

गबार्ड के अनुसार, इन दस्तावेजों से संकेत मिलता है कि अमेरिकी-वित्त पोषित जैविक प्रयोगशालाओं से जुड़े मामलों की जांच के दौरान कुछ महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी रही। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिजीज के पूर्व निदेशक एंथनी फौसी ने कोविड-19 की उत्पत्ति को लेकर तैयार किए गए खुफिया आकलनों को प्रभावित किया और बाद में कांग्रेस के सामने दिए गए बयान में इस तरह के किसी भी हस्तक्षेप से इनकार किया।

राष्ट्रीय खुफिया निदेशक कार्यालय द्वारा जारी इस रिपोर्ट को ट्रंप प्रशासन की उस व्यापक पहल का हिस्सा बताया जा रहा है, जिसके तहत महामारी की उत्पत्ति और उससे जुड़े सरकारी निर्णयों की फिर से समीक्षा की जा रही है। इस प्रक्रिया में विभिन्न खुफिया अधिकारियों की गवाही और आंतरिक संचार दस्तावेजों का भी अध्ययन किया गया है।

दस्तावेजों में दावा किया गया है कि जब कोविड-19 की उत्पत्ति को लेकर बहस तेज हुई कि यह प्राकृतिक रूप से फैला या चीन के वुहान स्थित प्रयोगशाला से जुड़ा है, तब कई स्तरों पर वैज्ञानिक और खुफिया समुदाय के बीच चर्चा हुई। इन बातचीतों में फौसी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं, जिसमें कहा गया कि उन्होंने कुछ वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों को खुफिया आकलन प्रक्रिया में सुझाव देने के लिए प्रभावित किया।

गबार्ड ने आरोप लगाया कि कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग किया और खुफिया जानकारी के मूल्यांकन में हस्तक्षेप किया। उन्होंने यह भी कहा कि महामारी के दौरान लाखों लोगों की जान जाने के बाद अब जनता को पूरी सच्चाई और पारदर्शिता मिलनी चाहिए।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि 2021 में अमेरिकी खुफिया समुदाय के भीतर ईमेल और आंतरिक संवाद में फौसी को एक विशेषज्ञ के रूप में संदर्भित किया गया था, जिनकी सलाह को कई मामलों में महत्वपूर्ण माना गया। इसी वजह से कुछ आकलन प्रक्रियाओं में उनकी राय को शामिल करने पर चर्चा हुई।

हालांकि, इस पूरे विवाद के बीच यह भी सामने आया है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियां अभी तक कोविड-19 की उत्पत्ति को लेकर किसी एक निश्चित निष्कर्ष पर नहीं पहुंची हैं। कुछ एजेंसियों का मानना है कि वायरस प्राकृतिक रूप से जानवरों से मानवों में फैला, जबकि कुछ इसे प्रयोगशाला से जुड़ी दुर्घटना की संभावना मानते हैं।

इस मुद्दे पर वैज्ञानिक समुदाय भी लंबे समय से विभाजित है और विभिन्न रिपोर्टें अलग-अलग निष्कर्षों की ओर इशारा करती रही हैं। नए दस्तावेजों के जारी होने के बाद यह बहस एक बार फिर तेज हो गई है और आने वाले समय में इस पर और राजनीतिक तथा वैज्ञानिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।

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