भारत ने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से अपने घरेलू संकट और आतंकवाद को दिए जा रहे समर्थन से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे प्रचार का सहारा लेता रहा है। भारतीय पक्ष ने यह भी कहा कि इस्लामी सहयोग संगठन द्वारा की गई टिप्पणियां तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और यह एकतरफा दृष्टिकोण को दर्शाती हैं। भारत ने यह दोहराया कि जम्मू कश्मीर भारत का हिस्सा था और है तथा हमेशा रहेगा और इस वास्तविकता को कोई भी बयान बदल नहीं सकता।
भारतीय प्रतिनिधि ने यह भी कहा कि असली मुद्दा वह क्षेत्र है जो पाकिस्तान के अवैध कब्जे में है और जिसे पाकिस्तान अधिकृत जम्मू कश्मीर के रूप में जाना जाता है। भारत ने आरोप लगाया कि वहां दशकों से लोगों के अधिकारों का हनन हो रहा है और सैन्य दबाव के कारण जनता की मूलभूत स्वतंत्रताओं को सीमित किया गया है। भारत ने कहा कि यह स्थिति किसी भी प्रकार से लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है और लगातार असंतोष और अशांति का कारण बनी हुई है।
भारत ने आगे कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद को अपनी नीति के रूप में इस्तेमाल करता है और फिर खुद को आतंकवाद का शिकार बताने की कोशिश करता है। भारतीय प्रतिनिधि ने इस विरोधाभास को उजागर करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस तरह की दोहरी नीति लंबे समय से देखी जा रही है। भारत ने यह भी कहा कि पाकिस्तान की ओर से किए जा रहे दावे वास्तविकता को नहीं बदल सकते और न ही तथ्यों को छिपा सकते हैं।
सिंधु जल संधि पर टिप्पणी करते हुए भारत ने कहा कि यह समझौता उस समय की परिस्थितियों में हुआ था जब क्षेत्रीय स्थिति अलग थी लेकिन अब समय बदल चुका है और जल संसाधनों के प्रबंधन को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुसार देखना होगा। भारत ने संकेत दिया कि आतंकवाद और सहयोग एक साथ नहीं चल सकते और किसी भी प्रकार की साझेदारी तभी संभव है जब पारस्परिक विश्वास और जिम्मेदारी सुनिश्चित हो।
भारत ने अपने वक्तव्य में यह भी स्पष्ट किया कि वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर शांति और स्थिरता के पक्ष में है लेकिन किसी भी प्रकार के झूठे प्रचार और राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित बयानों को स्वीकार नहीं करेगा। भारत ने दोहराया कि उसकी प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखना है तथा वह इस दिशा में हर आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।