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भारत की कला का वैश्विक प्रदर्शन पीएम मोदी ने फ्रांस में मैक्रों दंपति को दिए पारंपरिक हस्तशिल्प उपहार


नई द‍िल्‍ली । फ्रांस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और हस्तशिल्प परंपरा को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और उनकी पत्नी ब्रिजिट मैक्रों को विशेष उपहार भेंट किए। इन उपहारों के माध्यम से भारत की कला, संस्कृति और पारंपरिक शिल्प कौशल की गहराई और विविधता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित किया गया।

राष्ट्रपति मैक्रों को प्रधानमंत्री मोदी ने आंध्र प्रदेश की प्रसिद्ध हस्तनिर्मित कलमकारी महाभारत पेंटिंग भेंट की। यह पेंटिंग पारंपरिक कलमकारी शैली में तैयार की गई है और इसे बनाने में लगभग छह महीने का समय लगा। इस कलाकृति में महाभारत के विभिन्न प्रसंगों को अत्यंत सूक्ष्म और कलात्मक ढंग से दर्शाया गया है, जिसमें धर्म, न्याय, कर्तव्य और नैतिकता जैसे शाश्वत मूल्यों को उभारा गया है।

इस पेंटिंग का सबसे महत्वपूर्ण संदेश भगवद्गीता से प्रेरित है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को कर्म, आत्मसंयम और जीवन के कर्तव्य का मार्ग दिखाते हैं। यह कलाकृति केवल एक पौराणिक दृश्य प्रस्तुति नहीं बल्कि नैतिक नेतृत्व, मानवीय गरिमा और शांति जैसे सार्वभौमिक मूल्यों का प्रतीक भी मानी जाती है, जो आज की वैश्विक परिस्थितियों में भी प्रासंगिक हैं।

वहीं, ब्रिजिट मैक्रों को प्रधानमंत्री मोदी ने तेलंगाना का पारंपरिक पोचमपल्ली सिल्क स्टोल उपहार स्वरूप भेंट किया। यह स्टोल हाथ से बुनी गई इकत रेजिस्ट-डाइंग तकनीक से तैयार किया जाता है और अपनी विशिष्ट ज्यामितीय और पुष्पीय डिजाइनों के लिए प्रसिद्ध है। इसकी उत्कृष्ट बनावट और पारंपरिक शिल्पकला इसे भारतीय वस्त्र विरासत का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बनाती है।

भारत की यह हस्तशिल्प परंपरा न केवल सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती है बल्कि फैशन और कला की दुनिया में भी अपनी अलग पहचान रखती है। फ्रांस जैसे देश, जहां कला और फैशन को विशेष महत्व दिया जाता है, वहां ऐसे उपहार सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आपसी संबंधों को और मजबूत करने का माध्यम बनते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी अक्सर अपने विदेशी दौरों के दौरान विभिन्न वैश्विक नेताओं को भारत की पारंपरिक कला और हस्तशिल्प से जुड़े उपहार भेंट करते हैं। इसका उद्देश्य भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना और विश्व समुदाय को भारतीय शिल्प परंपरा से परिचित कराना है।

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