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अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीद से शेयर बाजार में लौटी मजबूती, लगातार दूसरे सप्ताह निफ्टी और सेंसेक्स ने दिखाई दमदार बढ़त

नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में कमी की उम्मीद और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने भारतीय शेयर बाजार को सप्ताहभर सकारात्मक दिशा प्रदान की। निवेशकों के बीच बढ़े भरोसे का असर यह रहा कि प्रमुख सूचकांक निफ्टी और सेंसेक्स लगातार दूसरे सप्ताह बढ़त दर्ज करने में सफल रहे। हालांकि सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन बाजार में मुनाफावसूली देखने को मिली, लेकिन पूरे सप्ताह का प्रदर्शन निवेशकों के लिए उत्साहजनक रहा।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती कूटनीतिक गतिविधियों ने वैश्विक निवेशकों की चिंताओं को कुछ हद तक कम किया। इससे ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता में राहत मिली और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सकारात्मक माहौल बना। इसी का लाभ भारतीय बाजार को भी मिला, जहां निवेशकों ने चुनिंदा क्षेत्रों में जमकर खरीदारी की।

सप्ताह के दौरान निफ्टी और सेंसेक्स दोनों ने मजबूत प्रदर्शन किया। हालांकि अंतिम कारोबारी सत्र में आईटी शेयरों में बिकवाली और निवेशकों द्वारा मुनाफा वसूली के कारण बाजार पर दबाव देखने को मिला। इसके बावजूद पूरे सप्ताह का रुख सकारात्मक बना रहा और प्रमुख सूचकांक उल्लेखनीय बढ़त के साथ बंद हुए। इससे यह संकेत मिला कि निवेशकों का भरोसा अभी भी बाजार में कायम है।

कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी ने भी बाजार को महत्वपूर्ण समर्थन दिया। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में गिरावट का सीधा असर उन अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ता है जो बड़े पैमाने पर तेल आयात करती हैं। भारत के लिए यह स्थिति महंगाई नियंत्रण, व्यापार संतुलन और आर्थिक स्थिरता के लिहाज से सकारात्मक मानी जाती है। इसी कारण निवेशकों ने कई क्षेत्रों में सक्रियता दिखाई।

सप्ताह के दौरान भारतीय मुद्रा में भी मजबूती दर्ज की गई। डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति बेहतर होने से विदेशी निवेशकों के दृष्टिकोण में सुधार देखा गया। वित्तीय बाजारों में मुद्रा की स्थिरता को निवेश के लिए अनुकूल संकेत माना जाता है और इसका असर शेयर बाजार की धारणा पर भी दिखाई दिया।

क्षेत्रवार प्रदर्शन की बात करें तो उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु, रियल एस्टेट, फार्मा और रक्षा क्षेत्र के शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन किया। विशेष रूप से रक्षा क्षेत्र में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही और इस क्षेत्र ने सप्ताह के दौरान उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की। मजबूत ऑर्डर बुक, दीर्घकालिक विकास संभावनाएं और सरकारी नीतिगत समर्थन इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।

इसके विपरीत सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र दबाव में रहा। वैश्विक स्तर पर तकनीकी सेवाओं की मांग को लेकर जारी चिंताओं और कमजोर कारोबारी अनुमानों के कारण आईटी कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। इससे संबंधित सूचकांक सप्ताह के सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में शामिल रहा।

मौद्रिक नीति के मोर्चे पर भी निवेशकों की नजरें बनी हुई हैं। प्रमुख वैश्विक केंद्रीय बैंकों द्वारा अपनाए जा रहे सतर्क रुख के कारण ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। वहीं भारत में भी नीति निर्माताओं का दृष्टिकोण फिलहाल संतुलित और सावधानीपूर्ण माना जा रहा है।

आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर मानसून की प्रगति, कृषि क्षेत्र की गतिविधियों, महंगाई के आंकड़ों और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर रहेगी। विशेष रूप से खरीफ फसलों की बुआई और ग्रामीण मांग से जुड़े संकेत बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव में और कमी आती है तथा कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित बनी रहती हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल आगे भी जारी रह सकता है। हालांकि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक आंकड़ों पर निवेशकों की सतर्क निगाह बनी रहेगी।

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