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डोभाल की अध्यक्षता में ब्रिक्स एनएसए मीटिंग, रणनीतिक सहयोग और सुरक्षा पर फोकस

नई दिल्ली । नई दिल्ली में 22 से 23 जून 2026 को ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन होने जा रहा है जिसकी अध्यक्षता भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल करेंगे। विदेश मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार इस उच्च स्तरीय बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी और एनएसए शामिल होंगे और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करेंगे।
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया तेजी से बदलते भू राजनीतिक परिदृश्य और नई तकनीकी चुनौतियों का सामना कर रही है। बैठक का मुख्य विषय आज की दुनिया के सामने मौजूद गैर पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियां तय किया गया है जिसके तहत साइबर सुरक्षा आतंकवाद सूचना युद्ध और उभरती तकनीक के सुरक्षा प्रभाव जैसे मुद्दों पर फोकस किया जाएगा।
दो दिन चलने वाली इस बैठक में सदस्य देश अपने अनुभव और रणनीतिक दृष्टिकोण साझा करेंगे ताकि सामूहिक सुरक्षा सहयोग को और मजबूत किया जा सके। विदेश मंत्रालय के अनुसार बैठक के दौरान काउंटर टेररिज्म और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के सुरक्षित उपयोग पर ब्रिक्स के संयुक्त कार्य समूहों की प्रगति की समीक्षा भी की जाएगी। इससे सीमा पार खतरों से निपटने और एक मजबूत बहुपक्षीय सुरक्षा ढांचा विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
भारत इस मंच के माध्यम से ब्रिक्स के भीतर सुरक्षा सहयोग को केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित न रखते हुए उसे रणनीतिक और तकनीकी मुद्दों तक विस्तारित करने की दिशा में काम कर रहा है। इसी बीच इस बैठक में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के शामिल होने की संभावना भी चर्चा में है जो अगस्त 2025 के बाद उनका पहला भारत दौरा होगा।
वांग यी चीन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की भूमिका भी निभाते हैं और एनएसए अजीत डोभाल के निमंत्रण पर भारत आ रहे हैं। इस यात्रा को भारत और चीन के बीच चल रहे संवाद और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रयासों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि वैश्विक कूटनीतिक गतिविधियों और अन्य अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों की टाइमिंग के कारण पिछले कुछ ब्रिक्स बैठकों में उनकी अनुपस्थिति भी देखी गई थी।
इस बार की बैठक को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इसमें बड़े भू राजनीतिक समीकरणों के बीच सुरक्षा सहयोग के नए रास्ते तलाशने की कोशिश होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक ब्रिक्स देशों के बीच रणनीतिक भरोसा बढ़ाने और वैश्विक सुरक्षा ढांचे को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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