मुकाबले की तकनीकी शुरुआत भारतीय एथलीट के लिए काफी चुनौतीपूर्ण साबित हुई। नीरज चोपड़ा का पहला प्रयास फाउल रहा, जिससे वे शुरुआती रैंकिंग में काफी पिछड़ गए थे। हालांकि, उन्होंने दूसरे प्रयास में 82.77 मीटर का थ्रो कर ट्रैक पर शानदार वापसी के संकेत दिए। इसके बाद अपने तीसरे प्रयास में नीरज ने पूरी ताकत झोंकते हुए भाले को 85.69 मीटर की दूरी पर फेंका, जिससे वे सीधे शीर्ष तीन खिलाड़ियों की कतार में शामिल हो गए थे। इस प्रदर्शन के बाद खेल प्रशंसकों को उनसे एक बार फिर पदक की उम्मीद बंध गई थी, लेकिन आगे के चक्रों में वे इस प्रदर्शन को और बेहतर नहीं कर सके।
प्रतियोगिता का रुख चौथे दौर में पूरी तरह बदल गया जब श्रीलंका के रुमेश पथिरागे ने 88.68 मीटर का एक विशाल थ्रो फेंककर अंक तालिका में शीर्ष स्थान हासिल कर लिया। इस दूरी के करीब विश्व का कोई भी अन्य जेवलिन थ्रोअर नहीं पहुंच सका और श्रीलंका के इस खिलाड़ी ने आसानी से चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम कर लिया। वहीं दूसरी ओर, नीरज चोपड़ा ने अपने चौथे प्रयास में 83.45 मीटर की दूरी तय की, जबकि उनका पांचवां प्रयास एक बार फिर फाउल हो गया। नियमानुसार अंतिम दौर में केवल शीर्ष तीन खिलाड़ियों को ही मौका दिया जाना था, जिसके कारण नीरज छठे प्रयास के लिए क्वालिफाई नहीं कर सके और उनका सफर पांचवें दौर के बाद ही समाप्त हो गया।
इस वैश्विक प्रतियोगिता में पदक न जीत पाने के बावजूद भारतीय खेमे के लिए एक बहुत बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। नीरज चोपड़ा ने अपने 85.69 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के बदौलत आगामी राष्ट्रमंडल खेल 2026 के लिए निर्धारित अनिवार्य क्वालिफिकेशन मार्क को आसानी से पार कर लिया है। इस प्रदर्शन के साथ ही उन्होंने आगामी राष्ट्रमंडल खेलों के मुख्य दल में अपनी जगह पूरी तरह से सुरक्षित कर ली है, जो आगामी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों के लिहाज से भारतीय एथलेटिक्स महासंघ के लिए एक राहत भरी खबर है।
खेल विश्लेषकों का मानना है कि चोट और लगभग नौ महीने के लंबे विश्राम के बाद सीधे डायमंड लीग जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर उतरना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता। नीरज चोपड़ा के प्रदर्शन में इस मुकाबले के दौरान निरंतरता की कुछ कमी अवश्य देखी गई, जिसके चलते उनके दो प्रयास फाउल रहे। इसके बावजूद पहली ही वापसी प्रतियोगिता में 85 मीटर से अधिक की दूरी हासिल करना उनके बेहतर शारीरिक स्तर और मानसिक दृढ़ता को दर्शाता है। खेल प्रेमियों और प्रशिक्षकों को पूरी उम्मीद है कि आगामी हफ्तों में अभ्यास के जरिए वे अपनी कमियों को सुधार कर आने वाले वैश्विक टूर्नामेंटों में एक बार फिर देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने में कामयाब होंगे।