पुलिस के अनुसार अब तक करीब 60 लाख रुपये बरामद किए जा चुके हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि चोरी की गई कुल रकम कितनी है और इस पूरे नेटवर्क में किन-किन लोगों की भूमिका रही। पूछताछ के दौरान कुछ आरोपियों ने कथित तौर पर ऐसे लोगों के नाम भी बताए हैं जिनकी भूमिका की अब जांच की जा रही है।
जांच में सामने आया कि चढ़ावे की गिनती के दौरान कथित रूप से नकदी की गड्डियां अलग कर दी जाती थीं। इसके बाद उन्हें अस्थायी रूप से बाथरूम में छिपाया जाता था ताकि किसी को शक न हो। मौका मिलने पर यह रकम मंदिर परिसर से बाहर पहुंचाई जाती थी और बाद में एक तय स्थान पर उसका बंटवारा किया जाता था। पुलिस अब इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि के लिए सीसीटीवी फुटेज, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।
एफआईआर में जिन आठ लोगों को नामजद किया गया है उनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू शामिल हैं। सभी आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है ताकि पूरे मामले की परतें खोली जा सकें।
जांच के अनुसार रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू मंदिर की गणना व्यवस्था में प्रभावशाली भूमिका निभाता था और गणना कक्ष की चाबी भी उसके पास रहती थी। सुभाष श्रीवास्तव गणना प्रक्रिया का प्रभारी बताया जा रहा है। वहीं अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा चढ़ावे की गिनती से जुड़े कार्यों में तैनात थे। पुलिस का दावा है कि इन दोनों के ठिकानों से चोरी की रकम भी बरामद हुई है। मनीष यादव, करुणेश पाण्डेय, रमाशंकर मिश्रा और अविनाश शुक्ला की भूमिका की भी विस्तार से जांच की जा रही है।
पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित गबन की राशि को किस तरह ठिकाने लगाया गया और क्या इस मामले में अन्य लोगों की भी संलिप्तता रही है। बरामद नकदी के अलावा बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है।
फिलहाल पुलिस सभी आरोपियों से पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है। जांच एजेंसियों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।