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भारतीय झंडे वाले एक ओर जहाज ने पार किया होर्मुज…. उर्वरक लेकर आ रहा APJ प्रीती 2


तेहरान।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में लगातार बढ़ते तनाव और व्यापारिक जहाजों पर हमलों के बीच भारत (India) के किसानों के लिए राहत की खबर सामने आई है. भारतीय झंडे वाला मालवाहक जहाज (Indian-flagged Cargo Ship) ‘APJ प्रीती 2’ शनिवार को ईरान की ओर से बताए गए समुद्री मार्ग से सुरक्षित होकर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पार कर गया. यह वही इलाका है जहां कुछ घंटे पहले एक तेल टैंकर पर हमला हुआ था, जिसके बाद समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने खतरे का स्तर बढ़ा दिया. वही ईरानी हमले के बाद अमेरिका ने भी ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमला किया था. रविवार को खबर आई कि लगातार दूसरे दिन ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है।


जहाज क्या लेकर आ रहा है?

एक रिपोर्ट के मुताबिक, APJ Priti 2 में करीब 65 हजार मीट्रिक टन उर्वरक लदा है. यह जहाज उन जहाजों की प्राथमिक सूची में शामिल था जिन्हें सबसे पहले सुरक्षित बाहर निकालने की योजना बनाई गई थी. जहाज ने ईरान की ओर से तय किए गए रास्ते का इस्तेमाल करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य पार किया. इस जहाज का आना भारत के किसानों के लिए राहत वाली खबर है. खास तौर पर जब खरीफ की फसलों की बुआई शुरू हो रही है।


होर्मुज में जहाज पर हुआ हमला

शनिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में कतर का तेल ले जा रहे एक टैंकर पर हमला हुआ. यह सप्ताह के भीतर किसी व्यापारिक जहाज पर दूसरा हमला था. ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी UKMTO के मुताबिक, हमले में जहाज के ब्रिज को नुकसान पहुंचा, लेकिन चालक दल सुरक्षित रहा और तेल रिसाव जैसी कोई घटना नहीं हुई. इसके बाद संयुक्त समुद्री सूचना केंद्र (JMIC) ने पूरे क्षेत्र में खतरे का स्तर बढ़ाकर ‘सब्स्टैंशियल’ कर दिया।

रिपोर्ट के अनुसार, अब तक भारत आने वाले 44 जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं. इनमें 17 भारतीय झंडे वाले और 27 विदेशी झंडे वाले जहाज शामिल हैं. इनमें कच्चे तेल के टैंकर, LPG और LNG कैरियर, बल्क कैरियर, कंटेनर जहाज और अन्य मालवाहक पोत शामिल हैं।


80 समुद्री माइंस की आशंका

अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने शुक्रवार को चेतावनी दी थी कि होर्मुज जलडमरूमध्य में करीब 80 समुद्री बारूदी सुरंगें (Sea Mines) बिछाई गई हो सकती हैं. अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के तहत इन्हें हटाने की जिम्मेदारी ईरान की है, लेकिन अभी तक यह साफ नहीं है कि कितनी माइंस हटाई जा चुकी हैं।

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