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होर्मुज की सुरक्षा पर फ्रांस का बड़ा कदम, माइनहंटर युद्धपोत तैनात, ब्रिटेन-ओमान के साथ मिलकर संभालेगा मोर्चा


नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में हालिया कूटनीतिक घटनाक्रम के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित समुद्री आवागमन सुनिश्चित करने के लिए फ्रांस ने बड़ा कदम उठाया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने जानकारी दी कि उनके देश ने क्षेत्र में बारूदी सुरंगों को निष्क्रिय करने वाले विशेष युद्धपोत (माइन काउंटरमेजर्स) तैनात किए हैं। साथ ही ब्रिटेन और फ्रांस ने ओमान के सहयोग से इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने और आवश्यकता पड़ने पर बहुराष्ट्रीय मिशन तैनात करने की प्रतिबद्धता जताई है।

राष्ट्रपति मैक्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बताया कि फ्रांस ने पश्चिम एशिया में दो माइनहंटर जहाज भेजे हैं। इनके साथ दो फ्रिगेट और एक मैरीटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट भी तैनात किया गया है। उन्होंने कहा कि ये सभी संसाधन सहयोगी देशों के साथ मिलकर होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित नौवहन बहाल करने और समुद्री यातायात की सुरक्षा मजबूत करने का काम करेंगे।

मैक्रों के अनुसार, 17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन को क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उनका कहना है कि इस समझौते से होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता को मजबूती मिली है।

फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने बताया कि ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक अल सईद से बातचीत के बाद फ्रांस ने अपनी सैन्य तैनाती में बदलाव किया है। इसके तहत एयरक्राफ्ट कैरियर शार्ल द गॉल को उसके होम पोर्ट टूलों वापस भेजा जा रहा है, जबकि माइन काउंटरमेजर्स जहाज और उनके साथ मौजूद सुरक्षा बल क्षेत्र में तैनात रहेंगे तथा जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई के लिए तैयार रहेंगे।

उधर, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और राष्ट्रपति मैक्रों ने शुक्रवार को जारी संयुक्त बयान में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है और यहां सभी देशों के जहाजों की सुरक्षित आवाजाही पूरी दुनिया के हित से जुड़ा विषय है।

संयुक्त बयान के अनुसार, ओमान ने अपने समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा मजबूत करने के लिए ब्रिटेन और फ्रांस के साथ मिलकर काम करने पर सहमति जताई है। दोनों देशों ने यह भी दोहराया कि वे क्षेत्रीय स्थिरता, सभी देशों की संप्रभुता के सम्मान और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

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