प्रधानमंत्री साणंद में सीजी सेमी आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट सुविधा के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में हो रही प्रगति और बड़े लक्ष्यों के साथ आगे बढ़ने की बात कही।
गुजराती कहावतों से शुरू हुई चर्चा
कार्यक्रम में सीजी पावर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस के चेयरमैन सुबैया ने अपने संबोधन में गुजराती की दो प्रसिद्ध कहावतों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने विकास के लिए स्पष्ट दिशा तय की है और अब उद्योग जगत की जिम्मेदारी है कि वह उसी सोच के साथ आगे बढ़े।
उन्होंने गुजराती कहावत “निशान चूक माफ, पण नहीं माफ नीचू निशान” का जिक्र करते हुए कहा कि ऊंचा लक्ष्य रखना जरूरी है। यदि लक्ष्य तक पूरी तरह नहीं पहुंचा जाए तो उसे स्वीकार किया जा सकता है, लेकिन छोटा लक्ष्य तय करना उचित नहीं है।
सुबैया ने यह भी बताया कि उनकी कंपनी की पहली सेमीकंडक्टर चिप्स की खेप जापान स्थित साझेदारों को भेजी जा रही है। उनके मुताबिक, यह भारत के वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में मजबूत भागीदारी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने दूसरी गुजराती कहावत “काम बोले छे” का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी कंपनी का काम ही उसकी सबसे बड़ी पहचान बनेगा।
पीएम मोदी ने ऐसे जोड़ा वायरल डायलॉग
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों कहावतों का उल्लेख करते हुए कहा कि वे कभी छोटे लक्ष्य या छोटी सोच में विश्वास नहीं रखते। उन्होंने कहा, “अगर मुझे कोई प्रतिमा बनानी हो, तो मैं उसे दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा बनाऊंगा।” इसे सरदार वल्लभभाई पटेल की स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की ओर संकेत माना गया।
इसके बाद प्रधानमंत्री ने मुस्कुराते हुए कहा, “और सुबैया जी ने ‘काम बोले छे’ भी कहा… सुन रहे हो न, विनोद… काम बोले छे।” यह सुनते ही सभागार में मौजूद लोगों और मंच पर बैठे अतिथियों के बीच हंसी और तालियों का दौर शुरू हो गया।
सोशल मीडिया पर लोकप्रिय है यह संवाद
“सुन रहे हो न, विनोद” और “देख रहे हो न, विनोद” जैसे संवाद एक वेब शो के बाद सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हुए। बाद में कंटेंट क्रिएटर्स और मीम पेजों ने इनका व्यापक इस्तेमाल किया, जिससे यह इंटरनेट पर चर्चित संवाद बन गया। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सार्वजनिक मंच से इसका उल्लेख किए जाने के बाद यह प्रसंग भी चर्चा का विषय बन गया।